महाराष्ट्र चुनाव में फिर उठा बवाल!
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर दावा किया कि राज्य में फर्जी वोटर बनाए गए हैं। लेकिन इस बार चुनाव आयोग चुप नहीं बैठा, बल्कि सीधे और तीखे अंदाज़ में सवाल दाग दिए!
आयोग बोला – जब इतना मालूम था तो अब तक शिकायत क्यों नहीं की?
आयोग ने कहा – “भाई, जब आपको पहले से पता था कि वोटर फर्जी हैं, तो कांग्रेस अब तक कहां सो रही थी? कोई शिकायत क्यों नहीं दी?”
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1 लाख से ज्यादा बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हाथ में पेन लिए बैठे हैं कि कांग्रेस शिकायत करे, लेकिन उधर से कोई हलचल ही नहीं!
हार के बाद रेफरी को दोष देना नया ट्रेंड?
आयोग ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा – “चुनाव हारने के बाद अब नेताओं का नया शौक बन गया है – रेफरी (चुनाव आयोग) को ही गलत ठहराओ!”
इतना ही नहीं, आयोग ने ये भी कहा कि ऐसे बेतुके आरोपों से 50 लाख से ज्यादा ईमानदार मतदान कर्मियों की मेहनत का अपमान होता है।
रहस्य नहीं, सब कुछ पारदर्शी है!
राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी उंगली उठाई। इस पर आयोग ने साफ किया – “नेहरू जी से लेकर मनमोहन सिंह तक सबने चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री की सिफारिश पर ही चुने। पहली बार अब कानून के तहत पारदर्शी नियुक्ति हुई है!”
कांग्रेस की मीटिंग टली, वजह थी आतंकी हमला
आयोग ने यह भी बताया कि सभी पार्टियों से चुनाव सुधारों पर बात हो चुकी है – सिर्फ कांग्रेस बची है। 15 मई को मीटिंग तय थी, लेकिन पहलगाम में आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की वजह से टालना पड़ा।
चुनाव आयोग का कहना साफ है —
“बोलने से नहीं, सबूत से बात बनती है। अगर फर्जी वोटर हैं, तो कागज़ दिखाइए, कैमरा नहीं!”
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