ब्रिटिश पर्वतारोही केंटन कूल ने एक बार फिर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया है। यह उनका 19वां सफल अभियान था, जिससे उन्होंने गैर-शेरपा पर्वतारोहियों में सबसे अधिक बार एवरेस्ट पर चढ़ने का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब वे अपने 20वीं चढ़ाई के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं और उनका इरादा है कि अगले वर्ष एक बार फिर इस चुनौती को स्वीकार करें।
अगले साल फिर चढ़ाई की योजना
कूल ने मंगलवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं अब 51 वर्ष का हूं और 2004 से हर साल यहां आता रहा हूं। अगले साल कम से कम एक और बार चढ़ाई करूंगा, शायद यह मेरी 20वीं या 21वीं चढ़ाई होगी। उसके बाद मैं नेपाल के अन्य पर्वतों की ओर ध्यान केंद्रित करूंगा।”
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सफल चढ़ाई के बाद काठमांडू वापसी
साउथ-वेस्ट इंग्लैंड से ताल्लुक रखने वाले केंटन कूल ने रविवार को 8,849 मीटर ऊंचे एवरेस्ट की चोटी पर सफलता प्राप्त की और फिर हेलीकॉप्टर से अपने ग्राहकों के साथ काठमांडू लौटे। इस बार उनके साथ शेरपा दोर्जी ग्याल्जेन भी शामिल थे, जिनके नाम यह 23वीं सफल चढ़ाई है।
2004 से लगातार प्रयास, कुछ साल अपवाद
कूल ने 2004 में पहली बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। तब से अब तक वे लगभग हर साल इस शिखर को छूते आए हैं। हालांकि, कुछ वर्षों में परिस्थितियों के कारण अभियान नहीं हो सका। 2014 में हिमस्खलन की त्रासदी के कारण चढ़ाई को रद्द करना पड़ा था, जब 16 शेरपा गाइडों की मौत हो गई थी। 2015 में नेपाल में आए भूकंप से उत्पन्न हिमस्खलन में 19 लोगों की जान गई थी, जिससे उस वर्ष का सत्र भी बाधित हुआ। इसके अलावा 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते चढ़ाई पूरी तरह रोक दी गई थी।
शेरपा गाइडों की अहम भूमिका
एवरेस्ट पर सर्वाधिक बार चढ़ने का कीर्तिमान नेपाली शेरपा गाइड कामी रीता के नाम है। उन्होंने अब तक कुल 30 बार इस चोटी को फतह किया है और वर्तमान में वे एक और प्रयास की तैयारी कर रहे हैं।
वसंत मौसम का सीमित अवसर
वसंत का यह मौसम पर्वतारोहण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय सैकड़ों पर्वतारोही एवरेस्ट सहित नेपाल के अन्य ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई में लगे हुए हैं। कई दलों ने सफलता प्राप्त कर ली है, जबकि अन्य अब भी चढ़ाई की तैयारी में हैं। मई के अंत तक इस मौसम की समाप्ति के साथ ही अधिकांश अभियान रुक जाएंगे, क्योंकि उसके बाद शुरू होने वाला मानसून पर्वतारोहण को बेहद जोखिम भरा बना देता है।
कूल की प्रेरणा: उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है
केंटन कूल का लगातार एवरेस्ट पर चढ़ाई करना उनकी असाधारण शारीरिक और मानसिक क्षमता का प्रमाण है। साथ ही, यह उनके उस जज्बे को भी दर्शाता है जो हर बार नई ऊंचाई छूने की प्रेरणा देता है। उनका यह जुनून न केवल पर्वतारोहण की दुनिया को प्रेरित करता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि उम्र केवल एक संख्या है — यदि हौसले बुलंद हों तो एवरेस्ट जैसी ऊंचाइयों को भी बार-बार छूना संभव है।
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