AI India Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इंडिया समिट 2026 के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर कई प्रमुख नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिसमें बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तेलुगु देशम पार्टी के नेता नारा लोकेश, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और बीआरएस नेता केटी राम राव ने इस घटना को देश की छवि के खिलाफ बताया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध से बढ़ा विवाद
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इंडिया समिट 2026 में देश-विदेश के कई बड़े प्रतिनिधि, तकनीकी एक्सपर्ट्स और उद्योग जगत के नेता शामिल हुए थे। यह सम्मेलन भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। जिसके बाद समिट के पांचवें दिन यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस होकर विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई। कई नेताओं ने इसे अनुचित और अशोभनीय करार दिया।
मायावती ने कहा देश की गरिमा का ध्यान रखें
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए पोस्ट करते हुए प्रदर्शन की कड़ी निंदा की। जिसमें उन्होंने कहा है कि जब कोई कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो और उसमें देश-विदेश के गणमान्य लोग शामिल हों, तब इस प्रकार का अर्द्धनग्न प्रदर्शन करना अत्यंत अशोभनीय है। यह कोई सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम होता तो बात अलग थी, लेकिन वैश्विक मंच पर ऐसा व्यवहार देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे देश की गरिमा और प्रतिष्ठा का ध्यान रखें।
नई दिल्ली में आयोजित ’एआई इम्पैक्ट समिट’, जिसमें देश व विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे तथा यह इवेन्ट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खि़यों में था, इस दौरान जिन भी लोगों द्वारा अर्द्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया है जिसमें अधिकतर कांग्रेसी युवा बताये जा रहे हैं, वह…
— Mayawati (@Mayawati) February 21, 2026
नारा लोकेश ने बताया दुखद और चौंकाने वाला
तेलुगु देशम पार्टी के नेता नारा लोकेश ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि AI समिट जैसा बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार को दुनिया के सामने रखने का अवसर होता है। साथ ही, ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन को राजनीतिक विरोध का मंच बनाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि इससे देश की वैश्विक छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन समय और स्थान का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
जगन मोहन रेड्डी बोले हमें एकजुट चेहरा दिखाना चाहिए
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना की। जिसमें उनका कहना है कि इस तरह की हरकत से पूरा देश शर्मिंदा हुआ है। वहीं, राजनीतिक विचार अलग हों, लेकिन जब देश का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय मंच पर हो रहा हो, तब सभी दलों को एकजुटता दिखानी चाहिए। उनके अनुसार राष्ट्रीय सम्मान और गौरव सर्वोपरि है।
केटी राम राव ने कहा लोकतंत्र में विरोध का भी समय और स्थान होता है
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी राम राव ने भी इस प्रदर्शन को अनुचित बताया है। जिसमें उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति स्वाभाविक है, लेकिन इसके लिए उचित मंच और समय होना चाहिए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जैसे कार्यक्रम का उपयोग राजनीतिक प्रदर्शन के लिए करना सही नहीं है। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अखिलेश यादव ने सरकार पर भी साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका पर काफी सवाल उठाए हैं। जिसमें उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को AI के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
साथ ही, समिट में चीन का मॉडल या रोबोट दिखाया गया, जो सरकार की चूक है। उन्होंने एक कार्टून का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें दिखाया गया है कि चीन का रोबोट मेक इन इंडिया के शेर को दौड़ा रहा है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि वह हंगामे और शर्टलेस प्रदर्शन के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई आंतरिक रूप से लड़ी जानी चाहिए और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे विदेशों के सामने देश की छवि खराब हो।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कुछ नीतिगत मुद्दों को लेकर विरोध जताया है। जिसमें उनका कहना था कि सरकार AI क्षेत्र में सही दिशा में काम नहीं कर रही है और विदेशी तकनीक पर निर्भरता बढ़ रही है। हालांकि, जिस तरीके से विरोध किया गया, उस पर अधिकांश राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर दो धड़े बन गए हैं। बता दें कि एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहा है, जबकि दूसरा इसे राष्ट्रीय मंच पर अनुचित व्यवहार मान रहा है।
राजनीतिक शिष्टाचार पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर से यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में राजनीतिक विरोध उचित है। कई एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन उसका तरीका और मंच भी उतना ही महत्वपूर्ण होना चाहिए।
भारत जैसे उभरते हुए तकनीकी राष्ट्र के लिए AI समिट जैसे कार्यक्रम वैश्विक निवेश और सहयोग के नए अवसर खोलते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से देश की छवि खराब हो सकती है।
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