देश में टैक्स चोरी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है. आयकर विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स की धांधली पकड़ ली है. जांच में सामने आया है कि इन रेस्टोरेंट्स ने पिछले पांच वर्षों में करीब 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाकर टैक्स नहीं चुकाया. यह कार्रवाई खासतौर पर हैदराबाद आयकर विभाग की यूनिट ने की, जिसने देशभर में इस्तेमाल हो रहे बिलिंग सॉफ्टवेयर के 60 टेराबाइट लेनदेन डेटा का विश्लेषण किया. शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि खाद्य बाजार में सॉफ्टवेयर के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर काली कमाई छिपाई जा रही थी.
कैसे पकड़ी गई धांधली? AI ने पैटर्न से खोली पोल
आयकर विभाग की टीम ने AI मॉडल्स की मदद से बिलिंग सॉफ्टवेयर के डेटा में असामान्य पैटर्न खोजे. AI ने यह पहचाना कि कई रेस्टोरेंट्स में बिक्री दर्ज होने के बाद बिल सिस्टम से हटा दिए जाते थे. कुछ मामलों में रकम बदल दी जाती थी, डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक बिक्री में बड़ा अंतर था.
जांच में सामने आया कि देशभर में 70,000 करोड़ रुपये की अघोषित बिक्री में से 13,317 करोड़ रुपये के बिल भुगतान के बाद डिलीट या बदले गए. यह तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा था ताकि टैक्स रिकॉर्ड में कम बिक्री दिखाई दे और टैक्स बचाया जा सके.
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में टैक्स चोरी का आंकड़ा सबसे ज्यादा था. इन दोनों राज्यों में 5,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री छिपाई गई. हैदराबाद जैसे बड़े फूड हब में चल रहे कई लोकप्रिय रेस्टोरेंट्स इस रडार में आए. आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बड़े शहरों में डिलीवरी ऐप्स और कैश/डिजिटल पेमेंट की वजह से बिक्री ज्यादा होती है, इसलिए वहां सॉफ्टवेयर से हेरफेर कर छिपाना आसान समझा गया.
जमीनी जांच में भी निकली सच्चाई
डेटा एनालिसिस के बाद आयकर विभाग ने 40 रेस्टोरेंट्स का फिजिकल वेरिफिकेशन किया.टीमों ने मौके पर जाकर वास्तविक बिक्री, किचन ऑर्डर, काउंटर पर हुए पेमेंट और कंप्यूटर रिकॉर्ड की तुलना की. इस छोटी सी जांच में ही करीब 400 करोड़ रुपये की अघोषित बिक्री सामने आ गई. इससे साफ हो गया कि AI के जरिए सामने आई गड़बड़ी जमीनी हकीकत से मेल खाती है.
कौन सा तरीका अपनाया जा रहा था?
जांच में सामने आए कुछ प्रमुख तरीके:
- पेमेंट के बाद बिल डिलीट करना: ग्राहक से पैसे लेने के बाद सिस्टम से बिल हटा दिया जाता था.
- रकम कम दिखाना:असली बिल की जगह कम रकम का रिकॉर्ड सेव करना
- डुप्लीकेट बिलिंग सॉफ्टवेयर: एक सॉफ्टवेयर असली बिक्री के लिए, दूसरा टैक्स रिकॉर्ड के लिए
- कैश ट्रांजैक्शन छिपाना :नकद भुगतान को पूरी तरह सिस्टम में दर्ज न करना
इन तरीकों से सालों तक टैक्स बचाया जा रहा था.
अभी जुर्माना और टैक्स की गणना बाकी
आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक केवल छिपाई गई बिक्री का आंकड़ा सामने आया है. इस पर कितना टैक्स, जुर्माना और ब्याज लगेगा इसकी गणना अभी बाकी है. संभावना है कि दोषी रेस्टोरेंट्स पर भारी जुर्माना लगेगा, बड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई और प्रोसीक्यूशन भी हो सकता है और बिलिंग सॉफ्टवेयर कंपनियों की भूमिका की भी जांच होगी.
सरकार की सख्ती और डिजिटल निगरानी का नया दौर
यह मामला बताता है कि सरकार अब AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए टैक्स चोरी पर सख्ती कर रही है.GST नेटवर्क,आयकर विभाग और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट अब डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर संदिग्ध लेनदेन को पकड़ रहे हैं.
वहीं,विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में POS सिस्टम, डिलीवरी ऐप्स के डेटा और UPI ट्रांजैक्शन को जोड़कर और सटीक निगरानी होगी.
ईमानदार व्यापारियों के लिए राहत, धोखेबाजों के लिए चेतावनी
इस कार्रवाई से ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले रेस्टोरेंट मालिकों को राहत मिलेगी, क्योंकि टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों से उन्हें अनुचित प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ती थी. वहीं, जो लोग सिस्टम से खेल कर टैक्स बचा रहे थे, उनके लिए यह कड़ा संदेश है कि डिजिटल दौर में छिपना आसान नहीं रहा.
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
आम ग्राहकों के लिए यह मामला एक सीख है. आम ग्राहकों को रेस्टोरेंट से हमेशा बिल लेना, डिजिटल पेमेंट पर रसीद सेव करना और संदिग्ध मामलों में शिकायत दर्ज करना, इससे टैक्स चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है.
बिलिंग सॉफ्टवेयर कंपनियों पर भी शिकंजा कस सकता है
जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि कुछ बिलिंग सॉफ्टवेयर कंपनियों ने ऐसे फीचर्स दिए, जिनसे बिल डिलीट या एडिट करना आसान हो जाता था. अब आयकर विभाग इन कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर सकता है. अगर यह साबित हुआ कि सॉफ्टवेयर जानबूझकर टैक्स चोरी को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया था, तो कंपनियों पर भी कार्रवाई संभव है. इससे भविष्य में बिलिंग सॉफ्टवेयर के नियम और सख्त हो सकते हैं.
GST सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन से बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार अब यह भी विचार कर रही है कि रेस्टोरेंट्स के POS और बिलिंग सॉफ्टवेयर को सीधे GST नेटवर्क से जोड़ा जाए. इससे हर बिक्री का डेटा रियल-टाइम में रिकॉर्ड होगा और बाद में बिल डिलीट या बदलने की गुंजाइश कम हो जाएगी.विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने से कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और टैक्स चोरी पर काफी हद तक रोक लगेगी.
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