Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज बड़ा जनसैलाब देखने को मिला.परेड ग्राउंड के बाहर “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” के बैनर तले महापंचायत का आयोजन किया गया. इस महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों के अलावा राज्य आंदोलनकारियों और कई सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया. लोगों का एक ही नारा था अंकिता को इंसाफ चाहिए.महापंचायत का मकसद इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को एकजुट आवाज देना था. भारी संख्या में पहुंचे लोगों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की.
क्या है मामला और क्यों फिर उठी आवाज?
अंकिता भंडारी हत्याकांड देशभर में चर्चा का विषय रहा है. समय बीतने के बावजूद पीड़ित परिवार और कई सामाजिक संगठन मानते हैं कि इस मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच अब भी पूरी तरह सामने नहीं आ पाई है. महापंचायत में मौजूद लोगों का कहना है कि कुछ अहम सवाल अब भी उत्तरहीन हैं. हत्या का असली मकसद क्या था? जिन लोगों पर आरोप लगे, क्या उनके पीछे कोई और ताकत थी? और क्या सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई? इन्हीं सवालों को लेकर आज देहरादून में फिर से आवाज बुलंद की गई.
CBI जांच को लेकर उठी अहम मांग
महापंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान ने सीबीआई जांच को लेकर बड़ा सवाल उठाया.उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अंकिता मामले की सीबीआई जांच एक पर्यावरणविद की एफआईआर के आधार पर करवा रहे हैं, जबकि सीबीआई जांच अंकिता के माता-पिता की तहरीर पर होनी चाहिए. डॉ. सचान ने यह भी मांग की कि सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्पष्ट रहे. उनका कहना था कि जिन लोगों ने सबूत मिटाने की कोशिश की, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए.
वसंत विहार थाने की तहरीर पर सवाल
डॉ. सत्यनारायण सचान ने वसंत विहार थाने में दी गई एक तहरीर को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उस थाने में तहरीर दी है, उनका अंकिता के परिवार से कोई सीधा संबंध नहीं है और वे किसी आंदोलन में भी नजर नहीं आए. उनका कहना था कि ऐसे लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. साथ ही उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स की जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि इस मामले में वे किन लोगों से संपर्क में थे. इस मांग पर महापंचायत में मौजूद लोगों ने समर्थन जताया.
संघर्ष मंच के फैसले सभी पार्टियां मानेंगी
महापंचायत में यह भी तय किया गया कि “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” की ओर से जो भी फैसले आज लिए जाएंगे, उन्हें सभी राजनीतिक दल मानेंगे. मंच के प्रतिनिधियों का कहना था कि यह मामला राजनीति से ऊपर है और इसमें न्याय दिलाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. महापंचायत में मौजूद नेताओं ने भरोसा दिलाया कि वे संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठाते रहेंगे और जब तक अंकिता को पूरा इंसाफ नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
सामाजिक संगठनों और राज्य आंदोलनकारियों की भूमिका
इस महापंचायत में सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि राज्य आंदोलनकारी और कई सामाजिक संगठन भी शामिल हुए. उनका कहना था कि यह लड़ाई किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “अगर आज हम चुप रहे, तो कल किसी और बेटी के साथ ऐसा हो सकता है. हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसे अपराध न हों.”
शिबा का बयान: जांच का आधार बदला जाए
महापंचायत में पहुंचीं शिबा ने कहा कि पर्यावरणविद की तहरीर के आधार पर सीबीआई जांच नहीं होनी चाहिए.उनके अनुसार, जांच अंकिता भंडारी के माता-पिता की शिकायत के आधार पर होनी चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की कि अंकिता हत्याकांड में अपराधी लोगों के मामलों के तहत आगे की जांच की जाए. शिबा का कहना था कि हत्या का असली मोटिव अभी तक सामने नहीं आया है. उन्होंने वीआईपी एंगल का जिक्र करते हुए कहा कि इस दिशा में भी निष्पक्ष जांच जरूरी है.
भीड़ में गूंजे नारे, इंसाफ की मांग
महापंचायत के दौरान परेड ग्राउंड के बाहर “अंकिता को न्याय दो”, “दोषियों को सजा दो” जैसे नारे गूंजते रहे. लोग हाथों में पोस्टर लिए सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे थे. कुछ लोगों की आंखों में आंसू थे तो कुछ गुस्से में नजर आए. यह साफ दिख रहा था कि समय बीतने के बावजूद लोगों के जख्म अब भी हरे हैं और वे जवाब चाहते हैं.
इस महापंचायत के बाद राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ गया है. विपक्षी दलों का कहना है कि अगर जांच में पारदर्शिता नहीं दिखी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बड़े जनआंदोलनों का असर सरकार की छवि पर भी पड़ता है. सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह मामले में तेजी से और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करे.



