Assam Assembly Election: असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मतदाताओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है. गुरुवार, 9 अप्रैल को 126 सीटों के लिए हुए मतदान में 85% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई, जो राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. इस बंपर मतदान ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. अब सभी की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब चुनाव के नतीजे सामने आएंगे और यह तय होगा कि असम की सत्ता किसके हाथों में जाएगी.
126 सीटों पर एक चरण में मतदान
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए एक ही चरण में मतदान कराया गया. सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक चली, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. राज्य के 35 जिलों में फैले 31,490 मतदान केंद्रों पर चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. चुनाव आयोग ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे, ताकि मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके.
85% से ज्यादा वोटिंग, लोकतंत्र का उत्सव
इस चुनाव में 85.38% मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अच्छा माना जा रहा है. यह आंकड़ा दिखाता है कि असम के लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार को लेकर कितने जागरूक हैं. खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां लोग सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुंच गए थे. महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी इस बार काफी ज्यादा रही, जो राज्य की बदलती राजनीतिक सोच को दर्शाती है.
NDA vs विपक्ष: सीधा मुकाबला
इस बार का चुनाव मुख्य रूप से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच माना जा रहा है. हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है. वहीं, गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य में फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है.
कई बड़े चेहरे मैदान में
इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हैं. इनमें मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया, AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, अखिल गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई जैसे नाम प्रमुख हैं. इन सभी नेताओं की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी हुई है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है.
मतदाताओं की बड़ी भागीदारी
इस चुनाव में करीब 2.50 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र थे. इनमें 1.25 करोड़ महिलाएं शामिल थीं, जो यह दर्शाता है कि महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा तीसरे लिंग के मतदाताओं ने भी अपने अधिकार का उपयोग किया, जो लोकतंत्र की समावेशी भावना को मजबूत करता है.

बंपर वोटिंग का क्या है मतलब?
विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा मतदान का मतलब यह हो सकता है कि जनता बदलाव चाहती है या फिर मौजूदा सरकार को दोबारा मौका देना चाहती है. हालांकि, यह कहना अभी मुश्किल है कि यह वोटिंग किसके पक्ष में जाएगी, लेकिन इतना जरूर है कि इससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है.
सुरक्षा और व्यवस्था रही दुरुस्त
चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. हर मतदान केंद्र पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके. चुनाव आयोग ने भी पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी और यह सुनिश्चित किया कि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से हो.
4 मई को आएंगे नतीजे
अब सभी की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतगणना होगी और चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे. यह दिन तय करेगा कि असम की जनता ने किस पार्टी को सत्ता की जिम्मेदारी सौंपी है.
राजनीतिक हलचल तेज
मतदान खत्म होने के बाद अब राजनीतिक दलों के बीच बैठकों और रणनीति का दौर शुरू हो गया है. हर पार्टी अपने-अपने आकलन के आधार पर जीत का दावा कर रही है. वहीं, एग्जिट पोल्स को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि असली तस्वीर तो नतीजों के दिन ही साफ होगी.
असम विधानसभा चुनाव 2026 में 85% से ज्यादा मतदान यह दिखाता है कि लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत है. यह चुनाव सिर्फ सत्ता बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की आवाज का प्रतिबिंब भी है. अब इंतजार है 4 मई का, जब यह साफ होगा कि असम की जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है. तब तक सियासी गर्मी और चर्चाएं जारी रहेंगी.
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