Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में गुरुवार 12 फरवरी 2026 को 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी है. यह चुनाव शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद देश में हो रहा पहला आम चुनाव है, इसलिए इसे बांग्लादेश के हालिया इतिहास का सबसे अहम राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है. लेकिन लोकतंत्र के इस बड़े दिन पर हिंसा की खबरों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया. मतदान के दौरान गोपालगंज और मुंशीगंज में मतदान केंद्रों के बाहर देसी बम फेंके जाने की खबर सामने आई है, जिसमें कई लोग घायल हो गए. इसके अलावा खुलना में जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों के साथ झड़प के दौरान बीएनपी (BNP) के एक नेता की मौत की सूचना मिली है. इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
शेख हसीना के बाद पहला चुनाव, दुनिया की नजरें बांग्लादेश पर
यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार हट गई थी और देश में प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम व्यवस्था बनी. इसी अंतरिम सरकार के तहत अब आम चुनाव कराए जा रहे हैं. सिर्फ संसद के गठन के लिए ही नहीं, बल्कि 84 बिंदुओं वाले सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है. माना जा रहा है कि अगर यह सुधार पैकेज पारित होता है, तो बांग्लादेश के राजनीतिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. यही वजह है कि इस चुनाव पर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है.
मतदान का हाल: सुबह से लगी कतारें, युवाओं में उत्साह
मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ और शाम 4:30 बजे तक चलना है. चुनाव आयोग के मुताबिक, दोपहर तक करीब 32.88% मतदान हो चुका था. कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं.खास बात यह रही कि युवाओं में खास उत्साह नजर आया, क्योंकि लाखों युवा इस चुनाव में पहली बार वोट डाल रहे हैं. अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इसे “नए बांग्लादेश का जन्मदिन” बताते हुए लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करने की अपील की. वहीं सेना प्रमुख ने भी नागरिकों से बिना डर के मतदान करने का आग्रह किया.
बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान और जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान समेत कई बड़े नेताओं ने खुद वोट डाला.बीएनपी ने जीत को लेकर भरोसा जताया है और जल्दी नतीजे घोषित करने की मांग भी की है. छात्र समूहों ने मतदाताओं से अपील की कि वे ईमानदार और जवाबदेह उम्मीदवारों को चुनें.
मतदान के बीच धमाके और झड़पें की घटनाएं
मतदान के दौरान सामने आई हिंसा की घटनाओं ने चुनाव की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गोपालगंज और मुंशीगंज मतदान केंद्रों के बाहर देसी बम फेंके गए, जिससे कई लोग घायल हुए.घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया.जमात-ए-इस्लामी समर्थकों के साथ झड़प में BNP के एक नेता की भी मौत हो गई. वहीं, ढाका और अन्य इलाकों के कुछ जगहों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की खबरें आईं.
इसके अलावा, मतदान से पहले और दौरान नकदी बरामदगी, पोलिंग एजेंटों को रोकने और पत्रकार पर हमले जैसी घटनाओं की खबरें भी सामने आई हैं. इससे चुनावी माहौल और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है.
हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में मतदान पूरी तरह रुका नहीं है और हालात नियंत्रण में हैं. सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त फोर्स भेजी गई है.
आरोप-प्रत्यारोप: आवामी लीग ने उठाए सवाल
इस चुनाव में आवामी लीग मैदान से बाहर है. पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को “दिखावा” करार देते हुए धांधली, धमकी और दमन के आरोप लगाए हैं. आवामी लीग का कहना है कि उनके समर्थकों और पोलिंग एजेंटों को कई जगहों पर रोका गया। कुछ इलाकों में मीडिया कर्मियों पर हमले की खबरें भी आई हैं। इन आरोपों ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि अंतरिम सरकार और चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज किया है।
मुकाबले की तस्वीर: किसके बीच है असली लड़ाई?
इस बार के चुनाव में आवामी लीग के बाहर रहने से मुकाबला मुख्य रूप से दो धड़ों के बीच माना जा रहा है. बीएनपी गठबंधन और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला मोर्चा दोनों पक्ष जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि इस बार चुनाव प्रचार में एआई आधारित कैंपेनिंग और सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखने को मिला है. इससे युवा मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की गई.
अर्थव्यवस्था और आम लोगों की उम्मीदें
राजनीतिक अस्थिरता का असर सीधे तौर पर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. महंगाई, रोजगार और निवेश जैसे मुद्दे आम लोगों के लिए सबसे बड़े सवाल बने हुए हैं. मतदाताओं का कहना है कि वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो देश में स्थिरता लाए और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करे. कई व्यापारिक संगठनों ने भी अपील की है कि चुनाव के बाद नई सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने और विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटाने पर प्राथमिकता दे.
सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हिंसा की घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. संवेदनशील इलाकों में सेना और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है. अंतरराष्ट्रीय संगठनों और पर्यवेक्षकों की नजर भी चुनावी प्रक्रिया पर बनी हुई है. कई देशों ने बांग्लादेश से अपील की है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए जाएं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे.



