Bharat Bandh : 12 फरवरी 2026 को देशभर में भारत बंद का आह्वान किया गया है. इस बंद का ऐलान संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते (India–US Interim Trade Agreement) के विरोध में किया है. किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे देश के कृषि क्षेत्र को लंबे समय में बड़ा नुकसान हो सकता है.
वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि इस समझौते में किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. सरकार का दावा है कि कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा गया है और GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) खाद्य उत्पादों को भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी.
भारत बंद क्यों?
संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप है कि भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल देगा. इससे देश के छोटे और मध्यम किसान विदेशी उत्पादों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे. किसानों का डर है कि अगर अमेरिका से सस्ता अनाज, दालें या अन्य कृषि उत्पाद भारत में आए, तो घरेलू फसलों के दाम गिर सकते हैं और किसानों की आय पर असर पड़ेगा.
SKM के संयोजक हन्नान मोल्लाह ने इस समझौते को “किसानों के साथ विश्वासघात” बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने अमेरिकी दबाव के आगे झुककर यह समझौता किया है. मोल्लाह ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से इस्तीफे की मांग भी की है.
4 फरवरी से 11 फरवरी तक अभियान, 12 को भारत बंद
किसान संगठनों ने भारत बंद से पहले देशभर में जागरूकता अभियान शुरू किया है. SKM के अनुसार,4 फरवरी से 11 फरवरी तक गांव-गांव, शहर-शहर किसानों और आम लोगों को इस समझौते के संभावित नुकसान के बारे में बताया जा रहा है. इस अभियान का समापन 12 फरवरी के भारत बंद के साथ होगा.
किसानों का कहना है कि यह सिर्फ एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि समझौते की शर्तों पर दोबारा विचार किया जाए.
सरकार का पक्ष: किसानों और डेयरी सेक्टर के हित सुरक्षित
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों की आशंकाएं बेबुनियाद हैं. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है.
सरकार के मुताबिक, जिन उत्पादों को टैरिफ रियायत से बाहर रखा गया है, उनमें शामिल हैं दूध, घी, मक्खन, चीज, दही जैसे डेयरी उत्पाद, गेहूं, चावल, मक्का, ज्वार, जौ, ओट्स और अन्य मोटे अनाज, कई सब्जियां और फ्रोजन फूड, काली मिर्च, जीरा, हल्दी, अदरक, धनिया और सरसों जैसे मसाले.
इसके अलावा मंत्री ने साफ कहा कि GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) खाद्य उत्पादों को भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी.उनका दावा है कि यह समझौता “आत्मनिर्भर भारत” को मजबूत करेगा और भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर देगा.
क्या है इंडिया–यूएस अंतरिम व्यापार समझौता?
इंडिया–यूएस अंतरिम व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया एक शुरुआती करार है. इसमें कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में टैरिफ रियायतें, बाजार पहुंच और व्यापार में सहूलियत जैसी बातें शामिल हैं. सरकार का तर्क है कि इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में ज्यादा मौके मिलेंगे और देश में निवेश बढ़ेगा. लेकिन किसान संगठनों का मानना है कि कृषि क्षेत्र जैसे संवेदनशील सेक्टर को इस तरह के समझौतों से बाहर रखना चाहिए था.
भारत बंद का असर: आम लोगों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
12 फरवरी को भारत बंद के दौरान कई जगहों पर सड़क जाम, बाजार बंद और परिवहन प्रभावित होने की संभावना है. किसान संगठनों ने दावा किया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करेंगे, लेकिन बड़े स्तर पर प्रदर्शन होने की वजह से आम लोगों को दिक्कतें हो सकती हैं.
संभावित असर:
- कुछ राज्यों में हाईवे और प्रमुख सड़कों पर प्रदर्शन
- मंडियों और ग्रामीण इलाकों में कामकाज प्रभावित
- शहरों में यातायात जाम और स्कूल-कॉलेजों पर असर
- प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो.
विशेषज्ञों की राय: समझौते पर संवाद जरूरी
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते जरूरी हैं, लेकिन कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्र में संतुलन बनाना बेहद अहम है. अगर किसानों को लगता है कि उनके हितों को नुकसान होगा, तो सरकार को उनसे संवाद बढ़ाना चाहिए और समझौते की शर्तों को पारदर्शी तरीके से समझाना चाहिए.
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि भारतीय कृषि को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए किसानों को सुरक्षा और समर्थन भी मिलना चाहिए जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), बीमा और सब्सिडी.
किसान आंदोलन और सरकार में टकराव क्यों बढ़ रहा है?
पिछले कुछ वर्षों में किसान आंदोलन और सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिला है. किसान संगठनों का आरोप है कि बड़े फैसले लेने से पहले उनसे पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया जाता.वहीं सरकार का कहना है कि वह किसानों के हित में ही नीतियां बना रही है, लेकिन विरोध राजनीति से प्रेरित है.
भारत बंद की घोषणा ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कृषि नीति और व्यापार समझौतों को लेकर किसानों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है.



