बिल्डर एग्रीमेंट में छिपा होता है पूरा खेल
असल में बिल्डर के धोखे की जड़ उसके एग्रीमेंट में ही होती है। घर खरीदने से पहले बायर-बिल्डर एग्रीमेंट को अच्छे से पढ़ना बहुत ज़रूरी है। इस एग्रीमेंट में तीन शब्द ऐसे होते हैं जिन पर ध्यान नहीं दिया तो नुकसान तय है।
[expander_maker id=”1″ more=”Read more” less=”Read less”]
ये हैं वो तीन अहम शब्द
घर खरीदते वक्त एग्रीमेंट में इन 3 शब्दों को ज़रूर जांचें:
1️⃣ कारपेट एरिया — वो हिस्सा, जिसे आप असल में अपने घर में इस्तेमाल करते हैं। यानी आपके कमरे, किचन, बाथरूम वगैरह।

2️⃣ सुपर बिल्ट-अप एरिया — इसमें कारपेट एरिया के साथ दीवारों की मोटाई, कॉमन एरिया, लिफ्ट, सीढ़ी, गार्डन जैसी जगहें भी जुड़ी होती हैं।

3️⃣ लोडिंग फैक्टर — कारपेट एरिया और सुपर बिल्ट-अप एरिया के बीच का फर्क ही लोडिंग फैक्टर कहलाता है।

सुपर बिल्ट-अप एरिया क्या होता है ?

सुपर बिल्ट-अप एरिया, कारपेट एरिया से ज्यादा होता है। इसमें घर की बाहरी दीवारें, कॉरिडोर, बालकनी, लिफ्ट एरिया, और सोसाइटी की सुविधाओं का हिस्सा भी जोड़ दिया जाता है। इसी के जरिए बिल्डर फ्लैट का कुल एरिया बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं।
RERA कानून क्या कहता है ?

RERA (Real Estate Regulatory Authority) के कानून के मुताबिक बिल्डर को फ्लैट की कीमत सिर्फ कारपेट एरिया के हिसाब से ही बतानी और बेचनी चाहिए। इसलिए एग्रीमेंट में जरूर देखें कि फ्लैट की कीमत और साइज कारपेट एरिया में ही लिखा हो। अगर बिल्डर सुपर बिल्ट-अप एरिया बता रहा है तो सतर्क हो जाइए।
बिल्डर का असली खेल क्या है ?

अक्सर बिल्डर सुपर बिल्ट-अप एरिया को ही सेल एरिया बताकर फ्लैट बेचते हैं। इससे आपकी असली रहने वाली जगह यानी कारपेट एरिया 25% से 40% तक कम हो जाती है।
उदाहरण के लिए —
अगर आप 1200 Sq.ft का फ्लैट ले रहे हैं, तो असल में आपको सिर्फ 800 Sq.ft की जगह ही मिलेगी। यानी बाकी की जगह तो कॉमन एरिया, गार्डन, सीढ़ी वगैरह में चली जाती है।
इसलिए घर खरीदने से पहले हमेशा बारीकी से एग्रीमेंट पढ़ें और इन तीन बातों का खास ख्याल रखें।
[/expander_maker]



