Burqa Ban: यूरोपीय देश डेनमार्क ने इन दिनों स्कूल और यूनिवर्सिटी को लेकर एक सख्त फैसला लिया है। दरअसल, डेनमार्क सरकार ने ऐलान किया है कि अब से स्कूलों और यूनिवर्सिटी में बुर्का और नकाब नहीं पहना जाएगा। इसे सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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इस संदर्भ में वह की सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में चेहरा ढकने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यहां पर हर एक छात्र समान है। शिक्षा के क्षेत्र में कोई भेदभाव नहीं होनी चाहिए।
सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पर बैन
साल 2018 से ही सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पहनने पर डेनमार्क ने रोक लगा रखी है। अब सरकार इस कानून को शैक्षणिक संस्थानों पर भी लागू करना चाहती है। इसके लिए सरकार की तरफ से अगले साल फरवरी में संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो देश के सभी स्कूलों और यूनिवर्सिटी में बुर्का, नकाब पहनने पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

प्रवासन और एकीकरण मंत्री का बयान
प्रवासन और एकीकरण मंत्री रासमस स्टोकलुंड ने कहा कि क्लासरूम में पढ़ाई के दौरान चेहरा ढका होना डेनमार्क की शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि जब सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने पर पहले से ही पाबंदी है, तो शैक्षणिक संस्थानों में भी इसे लागू किया जाना स्वाभाविक है।
इस्लामिक समूहों के द्वारा विरोध शुरू
सरकार के इस फैसले पर मानवाधिकार संगठनों और इस्लामिक समूहों के द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह फैसला भेदभावपूर्ण है और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। उनका तर्क है कि महिलाओं को अपने पहनावे को चुनने का अधिकार होना चाहिए।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने इस फैसले को लेकर पहले ही संकेत दे दिए थे कि सरकार जल्द ही यह कानून पेश करने वाली है। उन्होंने यहां तक कहा था कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज परिसरों से प्रेयर रूम हटाने पर भी विचार किया जाएगा।
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