दिलीप कुमार की पुण्यतिथि पर धर्मेंद्र हुए भावुक, शेयर की यादों की तस्वीर
7 जुलाई का दिन हिंदी सिनेमा के लिए एक भावुक याद दिलाता है। इसी दिन, 2021 में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
आज उनकी चौथी पुण्यतिथि पर सुपरस्टार धर्मेंद्र ने उन्हें याद करते हुए एक इमोशनल पोस्ट शेयर किया है।
इस पोस्ट के साथ सनी देओल के पिता धर्मेंद्र ने दिलीप कुमार को “फिल्म इंडस्ट्री के खुदा” कहा।
इसके अलावा, उन्होंने 7 जुलाई को “गमगीन और मनहूस दिन” बताया।
[expander_maker id=”1″ more=”Read more” less=”Read less”]
इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ धर्मेंद्र का पोस्ट
धर्मेंद्र ने इंस्टाग्राम पर एक ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीर शेयर की।
इसमें वे दिलीप कुमार के साथ आर्म रेसलिंग करते नजर आ रहे हैं।
उन्होंने लिखा, “आज का दिन कितना गमनाक और मनहूस दिन है।
आज के दिन मेरे बहुत ही प्यारे भाई, आप सब के चहिते अभिनेता, फिल्म इंडस्ट्री के खुदा, एक नेक और महान इंसान… दिलीप साहब… हमें हमेशा हमेशा के लिए छोड़ कर चले गए।”
हालांकि उन्होंने माना कि यह सदमा बर्दाश्त करना मुश्किल है, लेकिन खुद को तसल्ली दी कि दिलीप साहब कहीं आसपास ही हैं।
फैंस भी हुए इमोशनल
इस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर फैंस भी भावुक हो गए।
कई लोगों ने कमेंट कर लिखा कि दिलीप कुमार आज भी हमारे दिलों में जिंदा हैं।
वहीं, कुछ फैंस ने धर्मेंद्र की भावनाओं की तारीफ करते हुए लिखा कि उन्होंने दिल से अपने भाई को याद किया।
क्यों दिलीप कुमार कहलाए ‘ट्रेजेडी किंग’
दिलीप कुमार को भारतीय सिनेमा का ‘ट्रेजेडी किंग’ कहा जाता है। उन्होंने 1944 में ‘ज्वार भाटा’ फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे कई यादगार फिल्मों में नजर आए।
उनकी सबसे मशहूर फिल्मों में ‘देवदास’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘गंगा जमुना’, ‘नया दौर’ और ‘अंदाज’ शामिल हैं।
खासकर ‘मुगल-ए-आजम’ में सलीम के किरदार को आज भी लोग याद करते हैं।
बेहतरीन अभिनय और अनगिनत सम्मान
अपने लंबे करियर में दिलीप कुमार ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड जैसे बड़े सम्मान जीते।
इसके अलावा, उन्होंने भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और दमदार अभिनय आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

यादों में जिंदा रहेंगे दिलीप साहब
आखिर, धर्मेंद्र की तरह लाखों फैंस के लिए भी दिलीप कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे। वे एक मिसाल, एक अध्याय और एक एहसास हैं।
इसलिए, भले ही वे हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी यादें और फिल्में हमेशा जिंदा रहेंगी।
[/expander_maker]



