अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर से सुर्खियों में हैं। उन्होंने चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों एनवीडिया और एएमडी से कहा है कि अगर वे चीन को चिप बेचने का लाइसेंस चाहती हैं, तो उन्हें अपनी कमाई का 15% सरकार को देना होगा।
हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अभूतपूर्व कदम है, जिससे अमेरिका और चीन के बीच नया ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है।
एनवीडिया और एएमडी को माननी पड़ी शर्त
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों कंपनियों को ट्रंप सरकार की ये शर्त माननी पड़ी:
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रेवेन्यू का हिस्सा देना – एनवीडिया चीन को H20 चिप बेचने से और एएमडी अपने MI308 चिप बेचने से होने वाली कमाई का 15% अमेरिकी सरकार को देंगी।
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पहले लगी थी रोक – अमेरिका ने पहले सुरक्षा कारण बताते हुए इन चिप्स की बिक्री चीन को रोक दी थी।
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विशेषज्ञों के सवाल – जानकार पूछ रहे हैं कि सिर्फ 15% देने से सुरक्षा खतरे कैसे खत्म हो सकते हैं।
https://www.dgft.gov.in/CP/सीधे DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के Customer Portal (CP) की मुख्य सेवा सूची तक ले जाता है
चीन के लिए बनाई चिप, फिर भी रोक
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2023 में बाइडन सरकार ने चीन को चिप बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद एनवीडिया ने खास तौर पर चीन के लिए H20 चिप बनाई, लेकिन अप्रैल में ट्रंप सरकार ने इसकी बिक्री पर भी रोक लगा दी।
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सीईओ की कोशिशें – एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग ने कई महीनों तक लॉबिंग की।
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ट्रंप से मुलाकात – पिछले हफ्ते ट्रंप से मुलाकात के बाद कंपनी को बिक्री की इजाजत मिली।
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तनाव में बढ़ोतरी – जानकारों का मानना है कि यह कदम अमेरिका-चीन तकनीकी रिश्तों को और खराब कर सकता है।
कंपनियों पर निवेश का दबाव
दूसरी तरफ, ट्रंप सरकार अमेरिका में बड़े निवेश के लिए कंपनियों पर लगातार दबाव बना रही है।
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एप्पल – 100 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया।
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माइक्रोन टेक्नोलॉजी – 200 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई।
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एनवीडिया – 500 अरब डॉलर के एआई सर्वर प्रोजेक्ट का ऐलान किया।
इससे साफ है कि ट्रंप सरकार व्यापार और निवेश दोनों में आक्रामक नीति अपना रही है।
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