Droupadi Murmu: पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस के आयोजन स्थल को लेकर नाराज़गी जाहिर की। जिसमें उन्होंने कहा है कि कार्यक्रम के लिए चुना गया मैदान बहुत छोटा था, जिसके कारण बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं, लेकिन फिर भी समझ नहीं आ रहा कि इतने बड़े सम्मेलन के लिए छोटी जगह क्यों तय की गई।
पश्चिम बंगाल दौरे पर राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचीं। बता दें कि यह सम्मेलन सिलीगुड़ी महकमा परिषद के अंतर्गत आने वाले फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित किया गया था। संथाल समुदाय से जुड़े इस बड़े कार्यक्रम में देश-विदेश से कई प्रतिनिधि और समुदाय के लोग शामिल होने पहुंचे थे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान आयोजन स्थल को लेकर कुछ दिक्कतें सामने आईं। जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जिस जगह पर कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया था, वह काफी छोटी थी। इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। साथ ही, इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए बड़ा मैदान होना चाहिए था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस आयोजन का हिस्सा बन सकें।
छोटे मैदान को लेकर जताई नाराज़गी
राष्ट्रपति मुर्मू का कहना है कि जिस मैदान में कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया था, वहां पांच हजार लोगों के बैठने की भी व्यवस्था नहीं थी। जबकि संथाल समुदाय के लोग बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। जिसमें कई लोग दूर-दराज के इलाकों से कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, लेकिन जगह कम होने की वजह से उन्हें बाहर ही रहना पड़ा। यह स्थिति किसी भी बड़े सम्मेलन के लिए ठीक नहीं मानी जा सकती। साथ ही, राष्ट्रपति ने कहा कि जब कोई कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो और उसमें इतने बड़े समुदाय की भागीदारी हो, तो आयोजन स्थल भी उसी हिसाब से बड़ा और व्यवस्थित होना चाहिए।
विधाननगर मैदान देखकर हुईं हैरान
संथाल कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं। जिसके बाद वहां का बड़ा मैदान देखकर उन्होंने आश्चर्य जताया। जिसमें उन्होंने कहा कि विधाननगर का मैदान काफी बड़ा है और यहां लाखों लोगों के आने की क्षमता है। अगर संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इसी मैदान में किया जाता तो लाखों लोग आराम से इसमें शामिल हो सकते थे। इस मैदान को देखकर उन्हें लगा कि यहां करीब पांच लाख लोग भी एक साथ कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
‘ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं’
संबोधन के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन की तरह हैं और वह उन्हें बहुत स्नेह देती हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ममता बनर्जी उनसे नाराज़ हैं। लेकिन इसके बावजूद यह समझ में नहीं आता कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए छोटी जगह क्यों तय की गई। साथ ही उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह सोचा गया हो कि वह छोटे मैदान में आएं, कार्यक्रम में शामिल हों और फिर वापस लौट जाएं।
संथाल समुदाय के लिए महत्वपूर्ण सम्मेलन
दरअसल, 9वां अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस संथाल समुदाय के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस सम्मेलन का उद्देश्य संथाल समाज की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करना है। जिसमें इस तरह के आयोजनों में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी संथाल समुदाय के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसलिए कार्यक्रम का बड़ा और व्यवस्थित होना जरूरी माना जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के सम्मेलनों से आदिवासी समाज की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है और उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अवसर मिलता है।

बड़ी संख्या में लोग नहीं हो पाए शामिल
जानकारी के अनुसार, फांसीदेवा में आयोजित कार्यक्रम में जगह की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग शामिल नहीं हो पाए। जिसमें कई लोग मैदान के बाहर ही रह गए और कार्यक्रम को दूर से देखने के लिए मजबूर हुए। वहीं, इस स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने आयोजन की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर पहले से ही बड़े मैदान का चयन किया जाता तो यह समस्या नहीं होती।
आयोजन को लेकर उठे सवाल
राष्ट्रपति के इस बयान से आयोजन की व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जिसके बाद राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जिसमें कुछ लोगों का कहना है कि इतने बड़े सम्मेलन के लिए बेहतर योजना और व्यवस्था होनी चाहिए थी। वहीं कुछ लोग इसे प्रशासनिक चूक मान रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं देश की पहचान का अहम हिस्सा हैं। इसलिए इस तरह के आयोजनों को बड़े स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय के लोग देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनकी संस्कृति को सम्मान देना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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