Social Media Ban: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खास पहल से जुड़ने का न्योता दिया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्ती जरूरी है और भारत जैसे बड़े लोकतंत्र का इस पहल में शामिल होना दुनिया के लिए मजबूत संदेश होगा।
जानकारी के मुताबिक, मैक्रो इन दिनों भारत दौरे पर हैं। बता दें कि गुरुवार को दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में उन्होंने डिजिटल दुनिया से जुड़े खतरों और बच्चों की सुरक्षा पर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।
बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता
मैक्रों का कहना है कि कम उम्र में अनियंत्रित डिजिटल एक्सपोजर बच्चों की मानसिक सेहत, व्यवहार और सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अक्सर मुनाफे के दबाव में नाबालिगों को भी जोड़ लेते हैं, जबकि एल्गोरिदम उन्हें ऐसे कंटेंट तक पहुंचा सकते हैं जो उनकी उम्र के लिए सही नहीं होता।वहीं, आने वाले समय में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा G7 देशों की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होने वाली है। मैक्रों चाहते हैं कि लोकतांत्रिक देश मिलकर साझा नियम बनाएं ताकि इंटरनेट को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।
भारत को दिया खास निमंत्रण
मैक्रों ने मंच से ही प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया पहल और तेजी से बढ़ते टेक इकोसिस्टम की तारीफ की। जिसमें उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम तय करने वाला देश बन सकता है। साथ ही, भारत भी बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसी पहल में शामिल होगा। मैक्रों के अनुसार, अगर भारत इस कदम का समर्थन करता है तो दुनिया भर की टेक कंपनियों पर जिम्मेदारी से काम करने का दबाव बढ़ेगा।
अन्य देश भी उठा रहे कदम
मैक्रों का कहना है कि स्पेन भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम बनाने की तैयारी कर रहा है। जिसमें कई देशों के साथ आने से वैश्विक स्तर पर मजबूत मानक तैयार किए जा सकते हैं, जिससे बच्चों और किशोरों की बेहतर सुरक्षा संभव होगी।

सोशल मीडिया और एआई से नई चुनौतियां
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी बेहद जरूरी है, लेकिन फेक न्यूज, डीपफेक, एल्गोरिदमिक हेरफेर और ऑनलाइन कट्टरता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अगर इन पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो डिजिटल प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकते हैं। जिसमें सरकारों, नियामक संस्थाओं और टेक कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। जिम्मेदार एआई और सुरक्षित सोशल मीडिया के लिए साझा वैश्विक ढांचा बनाना समय की जरूरत है।
डिजिटल सहयोग की नई दिशा
मैक्रों ने संकेत दिया है कि यूरोप के सख्त डिजिटल नियम भविष्य का रास्ता दिखा सकते हैं। उन्होंने भारत और यूरोपीय देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही, ताकि टेक्नोलॉजी का उपयोग सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से हो सके। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और मैक्रों की यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो रही है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि कम उम्र में सोशल मीडिया की लत मानसिक तनाव, अकेलापन और गलत जानकारी के खतरे को बढ़ा सकती है।
आगे क्या संकेत?
दरअसल, भारत सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है, इसलिए यहां लिया गया कोई भी फैसला वैश्विक टेक नीति को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल इतना साफ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और टेक नीति का अहम मुद्दा बनने जा रही है। जिसमें मैक्रों का यह प्रस्ताव उसी दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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