टीम इंडिया इस समय टेस्ट क्रिकेट में बेहद कठिन दौर से गुजर रही है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी टेस्ट में हार के आसार बढ़ चुके हैं। कोलकाता में पहला मैच भी टीम इंडिया हार चुकी है। ऐसे में सीरीज 2-0 से हाथ से निकल सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यह घटना 13 महीने में दूसरी बार होगी जब भारत घरेलू कंडीशन में क्लीन स्वीप का सामना करेगा।
अब गंभीर सवाल उठ रहा है — क्या गौतम गंभीर की रणनीतियों ने भारत के टेस्ट क्रिकेट को कमजोर कर दिया है?
कई पूर्व क्रिकेटर और सिलेक्टर भी गंभीर के खिलाफ खुलकर बयान दे रहे हैं।
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गंभीर की 4 बड़ी गलतियाँ जो टीम इंडिया को भारी पड़ रही हैं
गलती 1: सिर्फ 3 स्पेशलिस्ट बैटर खेलाना

भारत के टेस्ट स्क्वाड में इस बार सबसे बड़ा बदलाव स्पेशलिस्ट बैटर्स की कमी है।
गौतम गंभीर की रणनीति में ऑलराउंडर्स को ज्यादा प्राथमिकता दी गई। इसके चलते भारत ने दोनों टेस्ट में केवल 3-3 स्पेशलिस्ट बैटर्स खिलाए।
पहले टेस्ट में बैटर्स स्पिन पिच पर लड़खड़ा गए। दूसरे मैच की पहली पारी में तीनों ने मिलकर 95 रन तो बनाए, लेकिन 4 से 7 नंबर तक के बल्लेबाज सिर्फ 23 रन ही जोड़ सके।
ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल जैसे खिलाड़ी टेस्ट की जरूरत के विपरीत रिस्की शॉट्स खेलकर आउट होते दिखे। इससे साफ है कि टीम की बैटिंग गहराई टूट चुकी है।
गलती 2: बैटिंग ऑर्डर में लगातार एक्सपेरिमेंट

गंभीर की कोचिंग में नंबर-3 की पोजिशन सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई है।
कभी वॉशिंगटन सुंदर, कभी साई सुदर्शन और कभी करुण नायर — किसी को भी इस महत्वपूर्ण जगह पर लंबा मौका नहीं दिया गया।
25 साल तक यह पोजिशन राहुल द्रविड़ और पुजारा जैसे बल्लेबाजों के कारण समस्या नहीं थी। लेकिन अब हर टेस्ट में बैटिंग ऑर्डर बदलने से टीम की स्थिरता खत्म हो गई है।
नंबर-5 पर भी लगातार बदलाव हुए। ऋषभ पंत, जुरेल और जडेजा तीनों को आजमाया गया, जिसका असर टीम पर नकारात्मक रहा।
गलती 3: स्ट्राइक फिंगर स्पिनर की कमी
रविचंद्रन अश्विन के रिटायर होने के बाद भारत के पास कोई स्ट्राइक फिंगर स्पिनर नहीं बचा।
जडेजा पर दबाव बढ़ गया है, लेकिन कप्तानी भी उनकी बॉलिंग का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रही।
वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल जैसे स्पिन ऑलराउंडर्स गेंद से प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे।
घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले साई किशोर, सारांश जैन और सौरभ कुमार को मौका नहीं मिल रहा है।
गलती 4: ऑलराउंडर्स पर जरूरत से ज्यादा भरोसा
सुंदर, अक्षर, जडेजा और नीतीश रेड्डी को लगातार मौका दिया जा रहा है।
लेकिन टेस्ट जैसे फॉर्मेट में उनकी ऑलराउंड स्किल टीम के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो रही।
नीतीश रेड्डी ना रन बना पा रहे और ना ही गेंदबाजी में लगातार प्रभाव डाल पा रहे।
उनकी जगह एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज टीम के लिए ज्यादा बेहतर होता।
गौतम गंभीर जुलाई 2024 में हेड कोच बने थे। उनकी कोचिंग में न्यूजीलैंड भारत को 3-0 से क्लीन स्वीप कर गया।
अब एक साल के भीतर साउथ अफ्रीका भी ऐसा कर सकता है।
भारतीय टीम के लिए यह दौर बेहद चिंता का विषय है क्योंकि 12 साल में घर में सिर्फ 4 टेस्ट हारे थे, लेकिन गंभीर की कोचिंग में यह आंकड़ा 13 महीने में ही बराबर हो गया है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं ?
अतुल वासन का बयान

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भारतीय बल्लेबाज स्पिन खेलना भूल चुके हैं।
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टीम टेस्ट क्रिकेट को गंभीरता से नहीं ले रही।
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टेस्ट फॉर्मेट के लिए कोच बदलना चाहिए और द्रविड़ को फिर लाना चाहिए।
सबा करीम का बयान

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भारत के बल्लेबाज बड़ी पारियां बनाने पर ध्यान नहीं दे रहे।
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टेस्ट में लंबे समय तक टिके रहना जरूरी है, लेकिन टीम जल्दबाज़ी में शॉट खेल रही है।
निष्कर्ष
भारत के टेस्ट क्रिकेट का वर्तमान प्रदर्शन कई सवाल खड़े कर रहा है।
गौतम गंभीर की रणनीतियों पर पुराने खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने भी उंगली उठाई है।
टीम को स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों और स्ट्राइक गेंदबाजों को वापस महत्व देना होगा, वरना भारत का टेस्ट स्ट्रक्चर और टूट सकता है।
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