Gold-Silver Prices: शुरुआत में ही सोना और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोमवार को दोनों कीमती धातुओं के भाव अचानक लुढ़क गए। जिसमें चांदी की कीमत एक झटके में करीब ₹8000 प्रति किलो तक गिर गई, वहीं सोना भी ₹6000 से ज्यादा सस्ता हो गया है। वहीं,इस गिरावट ने निवेशकों और बाजार एक्सपर्ट्स का ध्यान खींच लिया है। अब ऐसे में आमतौर पर जब दुनिया में तनाव या युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो सोना-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार हालात अलग नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भी इन कीमती धातुओं में तेजी आने के बजाय गिरावट देखने को मिल रही है।
खुलते ही चांदी के दाम में भारी गिरावट
आज सोमवार को एमसीएक्स (MCX) पर चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 5 मई एक्सपायरी वाली चांदी का भाव पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार को ₹2,59,435 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। लेकिन आज सोमवार को बाजार खुलते ही इसका भाव तेजी से गिरकर ₹2,50,746 प्रति किलो पर पहुंच गया। अब इस हिसाब से देखें तो चांदी की कीमत में ₹8,689 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। जिससे यह गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि इतने कम समय में इतनी बड़ी गिरावट कम ही देखने को मिलती है।
11 दिनों में ₹28,000 से ज्यादा सस्ती हुई चांदी
बता दें कि पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी की कीमत में लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। वहीं,27 फरवरी को एमसीएक्स (MCX) पर चांदी का भाव करीब ₹2,82,644 प्रति किलो था। इसके बाद से अब तक महज 11 कारोबारी दिनों में चांदी लगभग ₹31,898 प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है। इस गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इतनी तेजी से गिरावट क्यों हो रही है।
लाइफ टाइम हाई से ₹1.69 लाख तक टूटी चांदी
चांदी की कीमतों में मौजूदा गिरावट को समझने के लिए इसके पिछले रिकॉर्ड स्तर को देखना जरूरी है।जिसमें 29 जनवरी को एमसीएक्स (MCX) पर चांदी का वायदा भाव अपने लाइफ टाइम हाई ₹4,20,048 प्रति किलो पर पहुंच गया था। वहीं,उस समय बाजार में चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। लेकिन उसके बाद से कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। अगर मौजूदा कीमत की तुलना उस रिकॉर्ड स्तर से करें तो चांदी करीब ₹1,69,302 प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है।
सोने की कीमतों में भी आई बड़ी गिरावट
दरअसल, सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि सोने के दामों में भी आज सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली है। जिसमें एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव पिछले कारोबारी दिन ₹1,58,466 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। लेकिन सोमवार को बाजार खुलने के बाद यह गिरकर ₹1,52,222 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इस तरह 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹6,244 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई।
गोल्ड भी लाइफ टाइम हाई से काफी नीचे
सोने की कीमतें भी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं।जिसमें 29 जनवरी को सोने का भाव एमसीएक्स (MCX) पर ₹1,93,096 प्रति 10 ग्राम के लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद से कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है।वहीं, मौजूदा समय में सोना उस रिकॉर्ड स्तर से करीब ₹40,874 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बाद भी क्यों गिर रहे दाम
जानकारी के लिए बता दें कि आमतौर पर जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है, जैसे युद्ध या आर्थिक संकट, तब निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोना और चांदी खरीदते हैं। इससे इनके दाम बढ़ जाते हैं। लेकिन इस बार गिरावट देखने को मिल रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हो सकते है।

मुनाफावसूली (Profit Booking)
जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ जाती हैं तो निवेशक मुनाफा कमाने के लिए अपनी होल्डिंग बेच देते हैं। इससे कीमतों में गिरावट आ जाती है।
डॉलर की मजबूती
अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तो सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ता है।
वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव
कमोडिटी मार्केट में मांग और सप्लाई के बदलाव से भी कीमतों में तेजी से बदलाव आता है।
निवेशकों का रुख बदलना
कई बार निवेशक सोना-चांदी की जगह शेयर बाजार या अन्य निवेश विकल्पों की तरफ भी रुख कर लेते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
जानकारी के बता दें कि सोना और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट को निवेशकों के लिए एक अवसर भी माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है, क्योंकि कीमतों में गिरावट के दौरान खरीदारी करने से भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।हालांकि निवेश से पहले बाजार की स्थिति और वैश्विक संकेतों को समझना जरूरी होता है।
अब आगे क्या हो सकता है
बता दें कि अब आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करेंगी, जैसे वैश्विक आर्थिक स्थिति।
- अमेरिका की ब्याज दरों में बदलाव।
- डॉलर की मजबूती या कमजोरी।
- भू-राजनीतिक तनाव।



