HAMMER Missile: भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. राफेल लड़ाकू विमानों पर इस्तेमाल होने वाला खतरनाक और अत्याधुनिक हथियार सिस्टम ‘हैमर’ (HAMMER) अब भारत में बनाने की तैयारी है. इसके लिए भारत की नवरत्न कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांस की दिग्गज रक्षा कंपनी Safran Electronics & Defense के बीच एक रणनीतिक जॉइंट वेंचर की घोषणा हुई है. इस साझेदारी को ‘प्रोजेक्ट HAMMER’ नाम दिया गया है. यह खबर ऐसे समय पर सामने आई है जब 17 फरवरी को भारत और फ्रांस के बीच छठी वार्षिक रक्षा वार्ता कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में होने वाली है. इस अहम बैठक में भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की ओर से सशस्त्र बल एवं पूर्व सैनिक मामलों की मंत्री कैथरीन वॉत्रिन शामिल होंगी.माना जा रहा है कि इस बैठक में रक्षा सहयोग के तमाम पहलुओं पर चर्चा होगी और रक्षा उद्योग में साझेदारी को और गहरा करने पर जोर रहेगा.साथ ही, एक अहम डिफेंस डील पर भी मुहर लग सकती है.
क्या है HAMMER मिसाइल और क्यों है यह खास?
HAMMER का पूरा नाम है Highly Agile Modular Munition Extended Range. यह एक हाई-प्रिसिशन एयर-टू-ग्राउंड हथियार सिस्टम है, जिसे फ्रांस ने विकसित किया है. राफेल जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स में इसका इस्तेमाल दुश्मन के ठिकानों को बेहद सटीकता से निशाना बनाने के लिए किया जाता है.
इस हथियार की खासियत यह है कि यह “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर काम करता है. यानी एक बार टारगेट लॉक कर देने के बाद पायलट को हथियार की दिशा बदलने या उसे गाइड करने की जरूरत नहीं होती.यह हथियार खराब मौसम, रात के समय और दुश्मन के मजबूत डिफेंस सिस्टम के बीच भी सटीक हमला कर सकता है.
भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल विमानों के जरिए HAMMER हथियार का इस्तेमाल करती है. लेकिन अब तक यह हथियार विदेश से आयात किया जाता रहा है. ‘प्रोजेक्ट HAMMER’ के तहत इसका निर्माण भारत में होने से देश को तकनीकी मजबूती के साथ-साथ आर्थिक फायदा भी मिलेगा.
BEL-Safran जॉइंट वेंचर: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली नवरत्न कंपनी है और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में इसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.वहीं Safran Electronics & Defense फ्रांस की अग्रणी रक्षा कंपनियों में से एक है, जो एवियोनिक्स, नेविगेशन और हथियार प्रणालियों के लिए जानी जाती है. इन दोनों कंपनियों के बीच हुए जॉइंट वेंचर का मकसद सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer), लोकल मैन्युफैक्चरिंग और भविष्य में भारत को एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है. इससे न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई गति मिलेगी.
इस परियोजना के तहत भारत में निर्माण इकाइयों को विकसित किया जाएगा, जहां स्थानीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को आधुनिक रक्षा तकनीकों की ट्रेनिंग मिलेगी.इससे देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
17 फरवरी की रक्षा वार्ता: क्यों है यह बैठक अहम?
बेंगलुरु में होने वाली भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यह छठी वार्षिक बैठक है और इसमें रक्षा सहयोग के हर पहलू की समीक्षा की जाएगी.खासतौर पर रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाने, संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में राफेल से जुड़े अपग्रेड, नए हथियार सिस्टम और रक्षा निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर भी बातचीत हो सकती है. भारत और फ्रांस पहले से ही रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोगी हैं. ‘प्रोजेक्ट HAMMER’ जैसी पहल इस रिश्ते को और मजबूत करती है.
भारतीय वायुसेना को कैसे मिलेगा फायदा?
‘हैमर’ हथियार के भारत में निर्माण से भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता और मजबूत होगी.अब हथियारों की सप्लाई के लिए विदेशों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.किसी भी आपात स्थिति में देश के भीतर ही उत्पादन और सप्लाई संभव हो सकेगी. इसके अलावा, भारत में निर्माण होने से लागत में भी कमी आने की उम्मीद है. हथियारों की मरम्मत, अपग्रेड और मेंटेनेंस के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी.लंबे समय में इससे देश की रक्षा तैयारियों को रणनीतिक बढ़त मिलेगी.
रक्षा उद्योग में रोजगार और तकनीकी विकास
‘प्रोजेक्ट HAMMER’ सिर्फ एक हथियार निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत के रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर है. इससे देश में एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय कंपनियों को सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा.छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) भी इस परियोजना से जुड़कर रक्षा क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकेंगे.इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता भी मजबूत होगी.
भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी और भरोसे की दोस्ती
भारत और फ्रांस के रिश्ते सिर्फ कारोबारी नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं. दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को लेकर एक जैसे विचार रखते हैं. फ्रांस उन गिने-चुने देशों में से है जिसने भारत को संवेदनशील रक्षा तकनीक देने में भरोसा दिखाया है. राफेल डील के बाद दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए हैं. अब ‘प्रोजेक्ट HAMMER’ जैसे जॉइंट वेंचर से यह साझेदारी एक नए स्तर पर पहुंच रही है. यह सिर्फ हथियार निर्माण की बात नहीं है, बल्कि भविष्य की रक्षा जरूरतों को मिलकर पूरा करने की दिशा में एक मजबूत कदम है.



