IDFC First Bank Stock: IDFC First Bank से जुड़ा बड़ा मामला सामने आने के बाद अब राहत की खबर आई है। बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज 24 फरवरी को राज्य विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ने बैंक से 556 करोड़ रुपये रिकवर कर लिए हैं। इससे पहले बैंक ने 22 फरवरी को जानकारी दी थी कि हरियाणा सरकार के अकाउंट से जुड़े 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड का पता चला है।
जानकारी के लिए बता दें कि इस खबर के आने के बाद 23 फरवरी को बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई थी। लेकिन मुख्यमंत्री के बयान के बाद शेयरों में दोबारा तेजी लौटती नजर आई है।
फ्रॉड की खबर से शेयरों में आई थी बड़ी गिरावट
जानकारी के अनुसार, 22 फरवरी को IDFC First Bank ने खुलासा किया था कि बैंक की एक शाखा में हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस खुलासे के बाद 23 फरवरी को बैंक का शेयर लगभग 16 फीसदी तक गिर गया था। निवेशकों में घबराहट का माहौल था और भारी बिकवाली देखी गई।जिसके बाद आज 24 फरवरी को भी बाजार खुलते ही शेयरों में दबाव बना रहा, लेकिन दोपहर बाद अचानक रिकवरी देखने को मिली है।
मुख्यमंत्री का बयान बना टर्निंग पॉइंट
हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने विधानसभा में कहा है कि, 24 घंटे के अंदर राज्य सरकार को करीब 556 करोड़ रुपये वापस मिल गए हैं, जिसमें लगभग 22 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में शामिल हैं। जिसके बाद उन्होंने स्पष्ट कहा है कि हरियाणा सरकार का जमा पैसा दोबारा बैंक खाते में आ चुका है। वहीं, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बाजार का भरोसा कुछ हद तक लौटा चुका है और बैंक के शेयरों में बढ़ोतरी भी देखने को मिली है। बताया जा रहा है कि दोपहर 3:15 बजे तक बैंक का शेयर 1.76 फीसदी की बढ़त के साथ 71.81 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
बैंक के 4-5 कर्मचारियों पर आरोप
मुख्यमंत्री सैनी का कहना है कि यह मामला बैंक की चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा से जुड़ा है। साथ ही, इस फ्रॉड में बैंक के मिडिल और लोअर लेवल के 4 से 5 कर्मचारी शामिल हैं। जिसमें इन कर्मचारियों ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। बैंक ने संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
सरकार ने बनाई जांच कमेटी
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा है कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह बैंक कर्मचारी हो, कोई बाहरी व्यक्ति हो या सरकारी कर्मचारी सभी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, राज्य के एंटी-करप्शन ब्यूरो को मामले की गहराई से जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं, इसके अलावा वित्त सचिव की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की जांच करेगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी।

निवेशकों के लिए राहत की खबर
फ्रॉड की खबर के बाद निवेशकों में काफी चिंता थी। 16 % की गिरावट ने शेयर बाजार में हलचल मचा दी थी, लेकिन 556 करोड़ रुपये की रिकवरी की पुष्टि के बाद बाजार में सकारात्मक संकेत मिले। निवेशकों को यह भरोसा मिला कि बैंक की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। जिसके बाद एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि जांच में पारदर्शिता बनी रहती है और बैंक मजबूत कदम उठाता है, तो शेयरों में स्थिरता आ सकती है।
बैंक की छवि पर असर
दरअसल, रकम का बड़ा हिस्सा रिकवर हो गया है, लेकिन इस घटना ने बैंक की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
590 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम का फ्रॉड होना बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता पैदा करता है।वहीं,बैंक को अब अपने इंटरनल कंट्रोल और ऑडिट सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
क्या था पूरा मामला
- 22 फरवरी: बैंक ने 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड की जानकारी दी।
- 23 फरवरी: शेयर में 16% की गिरावट।
- 24 फरवरी: मुख्यमंत्री ने 556 करोड़ रुपये रिकवर होने की पुष्टि की।
- संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया।
- एंटी-करप्शन ब्यूरो और उच्च स्तरीय कमेटी जांच में जुटी।
यहां जानें आगे क्या होगा
जानकारी के मुताबिक,अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यदि जांच में और बड़े खुलासे होते हैं तो इसका असर बैंक और बाजार दोनों पर पड़ सकता है। वहीं अगर बैंक पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करता है और सिस्टम सुधारता है, तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस आ सकता है।
ये भी पढ़ें: युद्ध के तनाव के बीच ईरान में बड़ा हादसा, न्यूक्लियर प्लांट वाले शहर में सेना का हेलीकॉप्टर हुआ क्रैश



