India Canada Trade Deal: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही ऊर्जा, यूरेनियम, नागरिक परमाणु सहयोग और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी है। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि भारत और कनाडा का साझा विजन मानवता की भलाई, शांति और स्थिरता पर आधारित है। साथ ही, वैश्विक अस्थिरता के बीच दोनों लोकतंत्रों का साथ आना विश्व शांति के लिए सकारात्मक संदेश भी है।
पश्चिम एशिया संकट पर भारत की चिंता
जानकारी के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई है। जिसमें उनका कहना है कि भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का पक्षधर रहा है। साथ ही, यह भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है और सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। जिसमें भारत शांति और स्थिरता चाहता है। हम क्षेत्र के सभी देशों के संपर्क में हैं और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल ही में क्षेत्र में हुए सैन्य घटनाक्रमों के बाद तनाव बढ़ गया है, जिससे वैश्विक बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऐसे समय में भारत ने संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाते हुए कूटनीतिक समाधान की वकालत की है।
भारत-कनाडा के बीच ऐतिहासिक समझौते
बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और कनाडा ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी है। जिसमें दोनों देशों के बीच हुए कई समझौते हुए हैं।
यूरेनियम और नागरिक परमाणु सहयोग
जानकारी के लिए बता दें कि भारत और कनाडा ने यूरेनियम आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही, कनाडा भारत को परमाणु ईंधन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। साथ ही दोनों देशों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक पर सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। यह कदम स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि भी होगी।
क्रिटिकल मिनरल्स में साझेदारी
बता दें कि भविष्य की तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत और कनाडा ने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया है। जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकेल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों के लिए बेहद जरूरी हैं। इस समझौते से भारत की सप्लाई चेन सुरक्षित होगी और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, जबकि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। ऐसे में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए बहुत ही लाभकारी साबित हो सकती है।

2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि, हमारा उद्देश्य आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता को अनलॉक करना है। इसके लिए हमने जल्द ही एक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है। वहीं,यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाएगा, टैरिफ कम करेगा और निवेश के नए अवसर खोलेगा। इससे आईटी, कृषि, शिक्षा, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि कैनेडियन पेंशन फंड्स ने भारत में लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश किया है। जिससे यह भारत की विकास गाथा में कनाडा के भरोसे को दर्शाता है। साथ ही, दोनों देशों के कारोबारी समुदाय के साथ बैठक कर भविष्य की आर्थिक साझेदारी का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस साझेदारी से नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सहयोग इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेज प्रगति ला सकता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि जब दो मजबूत लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं, तो शांति और स्थिरता की आवाज और मजबूत हो जाती है। भारत और कनाडा दोनों बहुलतावादी और लोकतांत्रिक देश हैं, जिनके संबंध साझा मूल्यों पर आधारित हैं। साथ ही, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व की तारीफ भी की और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं।
वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की संतुलित नीति
जानकारी के लिए बता दें कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बावजूद भारत ने अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखा है। जिसमें भारत ने एक ओर जहां शांति और कूटनीति की वकालत की है, वहीं दूसरी ओर अपनी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत किया है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत की यह नीति उसे वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
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