भारत और फ्रांस की दोस्ती को नई ऊंचाई देने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा ऐलान किया. उन्होंने भारतीय छात्रों के लिए ‘सुपर गेट’ पहल की घोषणा की, जिसके तहत पढ़ाई और रिसर्च के लिए फ्रांस जाने वाले छात्रों को ट्रांजिट वीजा फीस में राहत और वीज़ा प्रक्रिया में आसानियां मिलेंगी.
इस पहल का मकसद भारत और फ्रांस के बीच शिक्षा, तकनीक और इनोवेशन के रिश्तों को मजबूत करना है. मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस भारत को केवल एक रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि भविष्य का ज्ञान-साथी भी मानता है.
2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का लक्ष्य
मैक्रों ने बताया कि फिलहाल हर साल करीब 10,000 भारतीय छात्र फ्रांस पढ़ाई के लिए जाते हैं.अब दोनों देशों ने मिलकर लक्ष्य रखा है कि 2030 तक यह संख्या बढ़ाकर 30,000 कर दी जाए.
उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, लंबी पढ़ाई (जैसे PhD) करने वालों को कोर्स की अवधि के हिसाब से वीजा दिया जाएगा और स्टूडेंट्स को ट्रांजिट वीजा में राहत मिलेगी, ताकि यूरोप में सफर आसान हो. वहीं, मैक्रों के मुताबिक, फ्रांस चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय छात्र AI, डेटा साइंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, हेल्थ-टेक जैसे क्षेत्रों में पढ़ाई करें और दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा दें.
राज शमानी के पॉडकास्ट में मैक्रों का बड़ा संदेश
भारत दौरे के दौरान Emmanuel Macron ने मशहूर पॉडकास्टर राज शमानी के शो में भारत-फ्रांस संबंधों पर खुलकर बात की. इस बातचीत में तकनीकी सहयोग, वैश्विक शक्ति संतुलन और बदलती विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
राज शमानी ने सवाल किया,
“क्या आपको लगता है कि भारत और फ्रांस मिलकर दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश कर रहे हैं?”
इस पर मैक्रों ने कहा,
“आपके देश के साथ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की पहल हुई है. मुझे सच में विश्वास है कि जब हम साथ काम करते हैं, तो बेहतर परिणाम देते हैं.” उन्होंने बताया कि दोनों देश रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, क्लाइमेट एक्शन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं.
रणनीतिक स्वतंत्रता:अमेरिका-चीन से अलग रास्ता
मैक्रों ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस दोनों किसी एक महाशक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहते.उन्होंने साफ कहा,
“हम अमेरिका और चीन दोनों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं. भारत और फ्रांस इन दोनों देशों के साथ अलग-अलग रिश्ते रखते हैं, लेकिन हम किसी एक पर निर्भर नहीं होना चाहते.”
मैक्रों के इस बयान को रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है. यह विचारधारा भारत की विदेश नीति से भी मेल खाती है, जिसमें संतुलित कूटनीति पर जोर दिया जाता है.
भारतीय छात्रों के लिए फ्रांस का खास संदेश
मैक्रों ने भारतीय युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि फ्रांस उन्हें सिर्फ पढ़ाई का मौका नहीं देना चाहता, बल्कि रिसर्च और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ना चाहता है. पढ़ाई के बाद वर्क और इनोवेशन के मौके देना चाहता है. वहीं, भारतीय छात्रों को फ्रांस में सेफ, फ्रेंडली और मल्टी-कल्चरल माहौल उपलब्ध कराना चाहता है. उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस की यूनिवर्सिटीज़ और टेक इंस्टीट्यूट्स भारतीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और इंडस्ट्री लिंक्ड प्रोग्राम्स बढ़ा रहे हैं.
शिक्षा से आगे,टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में साझेदारी
भारत और फ्रांस के रिश्ते अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं. दोनों देश AI और साइबर सिक्योरिटी, स्पेस मिशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट टेक और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय छात्रों का फ्रांस जाना इस सहयोग को ग्राउंड लेवल पर मजबूत करेगा, क्योंकि भविष्य के वैज्ञानिक और इंजीनियर दोनों देशों के बीच सेतु बनेंगे.
फ्रांस क्यों बन रहा है भारतीय छात्रों की पसंदीदा स्टडी डेस्टिनेशन?
पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस भारतीय छात्रों के लिए तेजी से उभरती हुई स्टडी डेस्टिनेशन बन रहा है. इसकी बड़ी वजह है वहां की किफायती फीस, कई कोर्स का अंग्रेज़ी माध्यम में उपलब्ध होना, और यूरोप के मजबूत रिसर्च नेटवर्क से जुड़ने का मौका.इसके अलावा, फ्रांस की यूनिवर्सिटीज़ इंडस्ट्री के साथ मिलकर कोर्स डिजाइन करती हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिल जाता है.
स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल सपोर्ट पर जोर
फ्रांस सरकार और वहां की यूनिवर्सिटीज़ भारतीय छात्रों के लिए चार्पैक स्कॉलरशिप (Charpak Scholarship) जैसी योजनाएं चला रही हैं. इसके अलावा कई संस्थान मेरिट-बेस्ड और नीड-बेस्ड स्कॉलरशिप भी ऑफर करते हैं. नए ऐलान के बाद उम्मीद है कि स्कॉलरशिप की संख्या और फाइनेंशियल सपोर्ट दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे मिडिल-क्लास बैकग्राउंड के छात्रों के लिए भी फ्रांस में पढ़ाई आसान होगी.
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
इस पहल से भारतीय छात्रों को कई फायदे होंगे:
- वीज़ा प्रक्रिया आसान होने से एडमिशन में देरी कम होगी
- ट्रांजिट वीजा फ्री होने से यूरोप में ट्रैवल आसान होगा
- फ्रांस की यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री एक्सपोज़र मिलेगा
- रिसर्च करने वाले छात्रों को लंबी अवधि का स्टेबल वीज़ा मिलेगा
Read Related News : AI ने पकड़ी 1.77 लाख रेस्टोरेंट की धांधली, 70 हजार करोड़ की टैक्स चोरी का हुआ पर्दाफाश


