Delhi Airport: राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर आज शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया है। बता दें कि विशाखापत्तनम से दिल्ली आ रही IndiGo की फ्लाइट (6E 579) में अचानक तकनीकी खराबी आने के बाद ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित करनी पड़ी है। हालांकि पायलट की सूझबूझ और एयरपोर्ट प्रशासन की तत्परता से विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और सभी 161 यात्रियों की जान बच गई।
क्या हुआ था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह फ्लाइट आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से दिल्ली के लिए उड़ान भरकर आ रही थी। उड़ान के दौरान अचानक विमान के इंजन में तकनीकी खराबी की आशंका सामने आई। जैसे ही पायलट को समस्या का अंदेशा हुआ, उन्होंने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पर तुरंत ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी गई है। इसके तहत रनवे 28 को खाली कराया गया और सभी आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया।
सुबह 10:54 बजे सुरक्षित लैंडिंग
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रोटोकॉल के बीच, इंडिगो की फ्लाइट ने सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर सुरक्षित लैंडिंग की। रनवे पर पहले से ही दमकल की गाड़ियां, एम्बुलेंस और मेडिकल टीम तैनात थीं। बता दें कि लैंडिंग के तुरंत बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित विमान से बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ।
161 यात्रियों की बची जान
जानकारी के अनुसार इस फ्लाइट में कुल 161 यात्री सवार थे। लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों की मेडिकल जांच की गई और उन्हें सुरक्षित उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। जिसमें कई यात्रियों ने पायलट और क्रू की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सूझबूझ से ही बड़ा हादसा टल पाया है।
इंडिगो ने शुरू की जांच
एयरलाइन IndiGo ने इस घटना के बाद तकनीकी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में इंजन में तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। कंपनी की इंजीनियरिंग टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि खराबी कितनी गंभीर थी और उसका असली कारण क्या था। इंडिगो के एक अधिकारी का कहना है कि “यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम इस घटना की विस्तृत जांच कर रहे हैं और सभी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।
एयरपोर्ट प्रशासन की मुस्तैदी
इस पूरे घटनाक्रम में दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन की भूमिका भी बेहद अहम रही। जैसे ही इमरजेंसी घोषित हुई, सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया। दमकल विभाग, मेडिकल टीम और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी तत्परता से काम किया, जिससे किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सका। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर थोड़ी भी देरी होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

संसद की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
दरअसल यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब हाल ही में संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट ने भारतीय विमानन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच कुल 754 विमानों का ऑडिट किया गया, जिनमें से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं। यानी लगभग 50% विमानों में किसी न किसी प्रकार की समस्या सामने आई।
क्या कहती है रिपोर्ट?
संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कमर्शियल विमान बेड़े का एक बड़ा हिस्सा तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। साथ में यह भी सुझाव दिया गया है कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ‘फंडामेंटल रीसेट’ यानी बुनियादी सुधार की जरूरत है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज की यह घटना उस रिपोर्ट की चेतावनी को सही साबित करती है। हालांकि, यह भी सच है कि समय पर कार्रवाई और ट्रेनिंग के कारण बड़ा हादसा टल गया।
यात्रियों में दिखा डर और राहत
विमान में मौजूद यात्रियों के लिए यह अनुभव बेहद डरावना रहा। कई यात्रियों ने बताया कि उड़ान के दौरान अचानक हलचल बढ़ गई थी और क्रू मेंबर्स भी सतर्क हो गए थे। हालांकि, लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली और पायलट की सराहना की। एक यात्री ने कहा, “कुछ समय के लिए लगा कि शायद हम सुरक्षित नहीं बच पाएंगे, लेकिन पायलट ने शानदार तरीके से स्थिति संभाली।”
सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर देश में विमान सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों और रिपोर्ट्स ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरलाइंस को मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही सरकार को भी इस दिशा में सख्त कदम उठाने होंगे।
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