सिंधु जल समझौता: गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान में पानी को लेकर चिंता गहराने लगी है। भारत और पाकिस्तान के बीच पानी बंटवारे का आधार रही Indus Waters Treaty के स्थगन के बाद हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। ऐसे में पाकिस्तान ने अब इस मामले को United Nations Security Council (UNSC) में उठाया है और भारत पर दबाव बनाने की मांग की है।
UNSC में पाकिस्तान की अपील
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए United Nations Security Council से हस्तक्षेप की मांग की है।संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि Asim Iftikhar Ahmad ने इस मुद्दे को ऑफिशियल तौर से उठाया है। जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar का पत्र UNSC के अध्यक्ष को सौंपा है। वहीं, इस पत्र में पाकिस्तान ने कहा है कि भारत को सिंधु जल संधि के सभी प्रावधानों जैसे जल डेटा साझा करना और तकनीकी सहयोग को तुरंत बहाल करना चाहिए। जिसमें पाकिस्तान का तर्क है कि ऐसा न होने पर क्षेत्र में जल संकट और अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारत ने संधि क्यों की स्थगित?
जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को हुए Pahalgam terror attack के बाद इस संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया। जिसमें भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि “खून और पानी साथ नहीं बह सकते।” इसका मतलब था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक सामान्य द्विपक्षीय समझौते भी प्रभावित हो सकते हैं। भारत का यह कदम कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना गया। इससे यह संकेत गया कि भारत अब सुरक्षा मुद्दों को लेकर पहले से ज्यादा सख्त रुख अपनाने को तैयार है।
पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी का महत्व
पाकिस्तान के लिए Indus River और इसकी सहायक नदियां Jhelum River और Chenab River जीवनरेखा के समान हैं। जिसमें देश की करीब 80% कृषि इसी जल प्रणाली पर निर्भर करती है, जिससे गेहूं, चावल और अन्य फसलों की सिंचाई होती है। इसके अलावा, पीने के पानी की आपूर्ति भी बड़े पैमाने पर इन्हीं नदियों से होती है। जलविद्युत परियोजनाएं भी इसी पर आधारित हैं, जो ऊर्जा जरूरतों को पूरा करती हैं। गर्मियों में पानी की मांग बढ़ने से इस पर निर्भरता और बढ़ जाती है, जिससे किसी भी तरह की कमी पाकिस्तान के लिए गंभीर संकट बन सकती है।

क्या है सिंधु जल संधि?
Indus Waters Treaty भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ एक महत्वपूर्ण जल बंटवारा समझौता है, जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता से लागू किया गया था। इस संधि के तहत पूर्वी नदियां रावी, ब्यास और सतलुज का नियंत्रण भारत को दिया गया, जबकि पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब मुख्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से में आईं। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच पानी को लेकर संभावित विवादों को लंबे समय तक नियंत्रित रखा। जिसमें खास बात यह है कि युद्ध और राजनीतिक तनाव के बावजूद भी यह संधि जारी रही, जिससे क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग बनाए रखने में मदद मिली।
मौजूदा संकट के कारण
दरअसल सबसे बड़ा कारण भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता राजनीतिक तनाव है, जिससे सहयोग की संभावनाएं कम हो गई हैं। इसके अलावा, भारत ने हाल की आतंकी घटनाओं को आधार बनाकर Indus Waters Treaty को स्थगित करने का फैसला लिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। वहीं, जलवायु परिवर्तन भी बड़ा खतरा बनकर उभरा है। जिसमें ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और बारिश का पैटर्न बदल रहा है। इसके साथ ही भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान ने पानी की मांग को और बढ़ा दिया है, जिससे संकट और गंभीर हो गया है।
भारत का रुख
भारत ने Indus Waters Treaty को लेकर अपने रुख में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है। जिसमें सरकार का कहना है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक सामान्य सहयोग और समझौते बहाल करना संभव नहीं है।
भारत का यह भी कहना है कि संधि के तहत उसे अपने हिस्से के जल संसाधनों का पूरा उपयोग करने का अधिकार है। इसी कारण भारत अब अपने जल प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं और हाइड्रोपावर विकास पर अधिक ध्यान दे रहा है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।
अब आगे क्या हो सकता है?
अब भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत पर निर्भर करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, Indus Waters Treaty से जुड़े विवाद का समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। इसके लिए दोनों देशों को संवाद फिर से शुरू करना होगा और तकनीकी स्तर पर सहयोग बहाल करना जरूरी होगा, जैसे जल डेटा साझा करना और संयुक्त बैठकों का आयोजन। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भूमिका भी बढ़ सकती है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आने वाले महीनों में पानी की कमी और तनाव दोनों ही गंभीर रूप ले सकते हैं।



