Crude Oil Price Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर दिखाई देने लगा है। बता दें कि आज सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रही है। जिसमें कारोबार की शुरुआत होते ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
जानकारी के लिए बता दें कि शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों को करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका जताई गई थी। जिसमें बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स करीब 2400 अंक तक गिरकर 76,600 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 700 अंक टूटकर 23,700 के करीब आ गया। साथ ही,बैंकिंग शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई और बैंक निफ्टी 2,200 से ज्यादा अंक टूट गया। बता दें कि सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 43 पैसे गिरकर 92.25 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया।दरअसल, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं बल्कि कई वैश्विक और आर्थिक वजहें जिम्मेदार हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध से बढ़ा वैश्विक तनाव
जानकारी के मुताबिक,पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। बता दें कि हाल ही में इजरायल द्वारा तेहरान के एक बड़े तेल डिपो पर मिसाइल हमला किए जाने की खबर के बाद तनाव और बढ़ गया है। वहीं,इस युद्ध में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। जिसमें अमेरिका के सख्त बयान और सैन्य कार्रवाई की संभावना ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। अब जब भी दुनिया में किसी बड़े क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनती है, तो निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। इसी वजह से शेयर बाजारों में बिकवाली बढ़ जाती है और बाजार नीचे आने लगता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
दरअसल,भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कीमत बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।बता दें कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। जिसके वजह से यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है। वहीं,युद्ध के कारण कई खाड़ी देशों ने उत्पादन में कटौती की है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो पिछले कई सालों का उच्च स्तर माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर युद्ध और बढ़ा तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती है। अब इससे महंगाई बढ़ेगी और कंपनियों की लागत भी बढ़ेगी, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर पड़ता है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भूमिका बहुत बड़ी होती है। अब जब विदेशी निवेशक पैसा निकालना शुरू करते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।जिसमें हाल के दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफआईआई (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जिसमें शुक्रवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 9,459 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की। यह लगातार छठा दिन है जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बिकवाली की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई (DII) ने करीब 6,972 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन विदेशी निवेशकों की निकासी का दबाव ज्यादा भारी पड़ा।
वैश्विक बाजारों में भी बड़ी गिरावट
जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय बाजार अकेले नहीं गिरे हैं। दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।
- जापान का निक्केई इंडेक्स लगभग 7.4% गिर गया
- टॉपिक्स इंडेक्स 5.8% टूट गया
- ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 करीब 4.3% गिरा
- हांगकांग का हैंग सेंग 2.9% नीचे आया। अब ऐसे में अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी भारी गिरावट देखी गई है। जिसमें डाओ फ्यूचर्स करीब 900 अंक नीचे दिखाई दिया, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स करीब 2.2% तक गिर गया। जब वैश्विक बाजारों में गिरावट आती है तो उसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ता है।
सेक्टोरल बिकवाली और बढ़ता डर
दरअसल, आज सोमवार को बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखी गई। खासतौर पर बैंकिंग, ऑटो और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। जिसमे पीएसयू बैंक सेक्टर लगभग 5% गिरा है,ऑटो सेक्टर करीब 4% टूटा है,फाइनेंशियल सेक्टर 3.7% गिरा है,मीडिया सेक्टर 3.4% नीचे आया है,मेटल सेक्टर में करीब 3% गिरावट रही है। इसके अलावा बाजार में डर का माहौल दिखाने वाला इंडिया VIX (वोलैटिलिटी इंडेक्स) भी तेजी से बढ़ा। इसमें करीब 21% की उछाल दर्ज की गई और यह 24 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। हालांकि एफएमसीजी, आईटी और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टरों में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। यह दर्शाता है कि निवेशक जोखिम वाले सेक्टरों से पैसा निकालकर सुरक्षित सेक्टरों की ओर जा रहे हैं।
निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर
अब ऐसे में वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक अब सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के उच्च स्तर 99.50 के पार पहुंच गया। इसके साथ ही सोने और चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला है। आमतौर पर जब दुनिया में आर्थिक या राजनीतिक संकट बढ़ता है तो निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं।
अब आगे बाजार का क्या होगा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति सही नहीं होती और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी रहती है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।अगर युद्ध और बढ़ता है या तेल की कीमतें लगातार ऊपर जाती हैं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर और ज्यादा पड़ सकता है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू होती है और तनाव कम होता है, तो बाजार में जल्द ही स्थिरता भी लौट सकती है।
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