Blue Bird Block-2: मोबाइल नेटवर्क को लेकर जल्द ही एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। अब से नेटवर्क न मिलने पर मोबाइल टावर या रेंज की चिंता लगभग पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। क्योंकि आपका फोन सीधे अंतरिक्ष से कनेक्ट किया जाएगा। दरअसल, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने Blue Bird Block-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च करा है, जो सीधे आपके मोबाइल फोन को 4G और 5G जैसी कनेक्टिविटी देगा। इस Blue Bird Block-2 सैटेलाइट का वजन लगभग 6100 किलोग्राम तक है।
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एंटीना या खास डिवाइस की जरूरत नहीं
जानकारी के लिए बता दें कि यह नई सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में लगेगी, जिसमें करीब 223 वर्ग मीटर का विशाल एंटीना लगेगा। जो हमारी पृथ्वी पर मौजूद आम स्मार्टफोन से सीधे संपर्क में लगातार रहेगा। वही, इस तकनीक के आने के बाद से यूजर्स को किसी भी अलग एंटीना या खास डिवाइस की जरूरत नहीं पड़ेगी। ध्यान रहे कि मौजूदा मोबाइल फोन ही इस नेटवर्क से जुड़ेंगे।
आज Blue Bird Block-2 हुआ लॉन्च
Blue Bird Block-2 सैटेलाइट को आज बुधवार, 24 दिसंबर के दिन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है। इसे ISRO के शक्तिशाली LVM3 रॉकेट के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया है। बता दें कि यह मिशन ISRO का साल 2025 का आखिरी और अब तक का 101वां मिशन रहा है।

क्या खत्म होगी मोबाइल टावर की जरूरत?
अपने ग्राहकों को 4G और 5G नेटवर्क की बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कंपनियों को जगह-जगह मोबाइल टावर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में नेटवर्क की ताकत और रेंज इन्हीं टावरों पर निर्भर होती है। इस तरह से दूर-दराज या पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क कमजोर रहने की सबसे बड़ी वजह होती है। लेकिन अब Blue Bird Block-2 सैटेलाइट के माध्यम से मोबाइल फोन सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाएंगे, जो अब नेटवर्क से जुड़ी परेशानी को कम करेंगे।
Experience the launch from the rocket’s perspective.
Watch the on-board camera visuals from #LVM3M6 capturing the journey of BlueBird Block-2 from liftoff to spacecraft injection.
For More information Visit:https://t.co/PBYwLU4Ogy#LVM3M6 #BlueBirdBlock2 #ISRO #NSIL pic.twitter.com/w4tBU209LU
— ISRO (@isro) December 24, 2025
जंगलों, पहाड़ों और समुद्री इलाकों में नेटवर्क मिलेगा तुरंत
अगर सैटेलाइट अपनी तय कक्षा में सही से पहुंच जाता है और साथ ही तकनीकी परीक्षण भी अच्छे से पूरा हो जाता हैं, तो किसी भी यूजर्स को बिना किसी अलग हार्डवेयर के सीधे सेल्युलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे गांवों, जंगलों, पहाड़ों और समुद्री इलाकों में भी नेटवर्क तुरंत और आसानी से उपलब्ध हो पाएगा।
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