Janakpuri Accident: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. सड़क पर खुले पड़े गड्ढे में गिरकर कमल की मौत के मामले में अब एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. पुलिस को मिले CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि हादसे के वक्त चार लोग वहां मौजूद थे. उन्होंने कमल को गड्ढे में गिरते देखा, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ा न किसी ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की और न ही तुरंत पुलिस या एंबुलेंस को सूचना दी.
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि इंसानियत पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर है. जिस समय कमल मदद की उम्मीद में तड़प रहा था, उसी समय लोग खड़े होकर देखते रहे. यह दृश्य देखकर हर किसी का दिल भर आता है.
रात 12 बजे का मंजर, कैसे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा रात करीब 12 बजे हुआ. कमल अपनी बाइक से गुजर रहा था. सड़क पर दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदा गया गड्ढा खुला पड़ा था. अंधेरा होने की वजह से कमल को गड्ढा नजर नहीं आया और वह सीधे उसमें गिर गया. पास के एक कैफे में लगे CCTV कैमरे में पूरी घटना कैद हो गई. फुटेज में देखा गया कि कमल के गिरते ही उसकी बाइक भी गड्ढे में चली गई. बाइक की लाइट जल रही थी और कमल बाइक के नीचे दबा हुआ तड़प रहा था. उस समय सड़क पर मौजूद लोग यह सब देख सकते थे.
CCTV फुटेज में एक कार सवार व्यक्ति विपिन को देखा गया है. वह अपनी गाड़ी रोककर गड्ढे के पास आता है और अंदर झांककर देखता है. उस समय कमल जिंदा था और मदद के लिए संघर्ष कर रहा था. फुटेज में यह भी दिखता है कि मौके पर कुल चार लोग मौजूद थे. उन्होंने स्थिति को देखा, लेकिन किसी ने भी कमल को बाहर निकालने या मदद के लिए फोन करने की कोशिश नहीं की. कुछ देर रुकने के बाद वे लोग वहां से चले गए.
पुलिस के अनुसार, अगर समय पर मदद मिल जाती, तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी. यह सोचकर हर किसी का मन भारी हो जाता है.
पुलिस की जांच तेज, जिम्मेदारों की तलाश
जनकपुरी पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है. CCTV फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जो मौके पर मौजूद थे. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गड्ढा किस विभाग द्वारा खोदा गया था और उसे खुला क्यों छोड़ा गया. प्राथमिक तौर पर यह सामने आया है कि यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े किसी काम के दौरान खोदा गया था. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि काम पूरा होने के बाद सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए. गड्ढे के आसपास न कोई बैरिकेड था, न चेतावनी बोर्ड और न ही कोई लाइट लगाई गई थी.
विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
इस हादसे ने दिल्ली में सड़क सुरक्षा और विभागीय लापरवाही पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. अक्सर देखा जाता है कि सड़क किनारे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए जाते हैं. कई जगहों पर न बैरिकेडिंग होती है और न ही रात के समय चेतावनी लाइट लगाई जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जनकपुरी इलाके में पहले भी इस तरह के गड्ढे खुले पड़े रहते हैं. उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई. अगर प्रशासन ने पहले ही ध्यान दिया होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था.
किसी ने मदद क्यों नहीं की?
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि हादसे के वक्त वहां लोग मौजूद थे, फिर भी किसी ने मदद नहीं की. यह सवाल खड़ा करता है कि हम एक समाज के तौर पर कितने संवेदनशील रह गए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग कानूनी झंझट के डर से मदद करने से बचते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि पुलिस केस में फंस जाएंगे. हालांकि, भारत में ‘गुड समैरिटन लॉ’ मौजूद है, जो मदद करने वालों को कानूनी सुरक्षा देता है. इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण लोग आगे नहीं आते.
परिवार का दर्द और इंसाफ की मांग
कमल के परिवार पर इस हादसे का गहरा असर पड़ा है. परिवार का कहना है कि उनका बेटा या भाई जिंदा था और अगर समय पर मदद मिलती, तो उसकी जान बच सकती थी. परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि गड्ढा खुला छोड़ने वाले अधिकारियों और मौके पर मौजूद लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. परिवार का कहना है कि सिर्फ मुआवजा काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदारों को सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह का दर्द न झेले.
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग हरकत में आए हैं. गड्ढे को तत्काल भर दिया गया है और आसपास के इलाके में सुरक्षा उपाय बढ़ाए गए हैं.
अधिकारियों का कहना है कि जिन जगहों पर सड़क खुदाई का काम चल रहा है, वहां अब बैरिकेडिंग और चेतावनी लाइट लगाना अनिवार्य किया जाएगा.साथ ही, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की बात भी कही गई है.
सड़क सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी
यह हादसा सिर्फ प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी की कमी भी दिखाता है. अगर हम किसी को मुसीबत में देखते हैं, तो मदद करना हमारा मानवीय कर्तव्य है. विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. लोगों को यह समझाना होगा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा धर्म है और कानून मदद करने वालों के साथ खड़ा है.



