Kanshi Ram Jayanti: बहुजन समाज की राजनीति को नई दिशा देने वाले महान नेता Kanshi Ram की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर Mayawati ने उन्हें याद करते हुए कहा कि कांशीराम ने अपना पूरा जीवन समाज के दबे-कुचले और वंचित वर्गों को एकजुट करने में समर्पित कर दिया. बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि कांशीराम ने B. R. Ambedkar के विचारों को आगे बढ़ाने का काम किया और बहुजन समाज को एक नई राजनीतिक पहचान दी. उन्होंने लोगों से अपील की कि बहुजन समाज पार्टी के आंदोलन को मजबूत करने के लिए समाज के सभी लोग एकजुट हों.
मायावती ने सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि
कांशीराम जयंती के मौके पर मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने लिखा कि बसपा के संस्थापक और बहुजन समाज के महान शिल्पकार कांशीराम को उनके करोड़ों अनुयायियों की ओर से शत-शत नमन. मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बाबा साहेब आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित किया.
बहुजन समाज को दी नई पहचान
मायावती ने कहा कि कांशीराम ने समाज के उन वर्गों को एकजुट किया जो लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक रूप से उपेक्षित थे. उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों को एक साझा पहचान दी जिसे “बहुजन समाज” कहा गया. कांशीराम का मानना था कि यदि समाज के ये वर्ग एकजुट हो जाएं तो वे राजनीतिक सत्ता में भी अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं.
BSP आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान
मायावती ने अपने संदेश में बहुजन समाज के लोगों से अपील की कि वे Bahujan Samaj Party के आंदोलन को और मजबूत करें.उन्होंने कहा कि BSP का उद्देश्य केवल राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति सुनिश्चित करना है. मायावती ने लोगों से कहा कि वे ईमानदार अंबेडकरवादी (Ambedkarite) बनें और अपने वोट की ताकत से राजनीतिक सत्ता की “मास्टर की” हासिल करें.
कौन थे कांशीराम?
कांशीराम भारतीय राजनीति के उन नेताओं में से एक थे जिन्होंने सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूत आधार दिया. उनका जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब में हुआ था. उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बिताया.
सामाजिक न्याय के आंदोलन के प्रमुख नेता
कांशीराम ने अपने राजनीतिक जीवन में यह महसूस किया कि देश में सामाजिक और आर्थिक असमानता की समस्या को केवल सामाजिक आंदोलनों से नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति के माध्यम से भी दूर किया जा सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से संगठित करने का अभियान शुरू किया.
1984 में BSP की स्थापना
कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना की. इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यकों को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में संगठित करना था. BSP ने धीरे-धीरे उत्तर भारत की राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली.
कांशीराम और मायावती की राजनीतिक साझेदारी
कांशीराम ने राजनीति में मायावती को आगे बढ़ाया और उन्हें अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया. मायावती बाद में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और उन्होंने कई बार इस पद को संभाला. कांशीराम और मायावती की जोड़ी ने उत्तर भारत की राजनीति में बहुजन आंदोलन को मजबूत किया.
कांशीराम को भारत में दलित राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है. उन्होंने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को एकजुट करने की रणनीति अपनाई और इसे “बहुजन राजनीति” का नाम दिया.उनका नारा “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” काफी प्रसिद्ध हुआ.
संगठन निर्माण में निभाई बड़ी भूमिका
कांशीराम केवल एक राजनेता ही नहीं बल्कि एक कुशल संगठनकर्ता भी थे. उन्होंने देशभर में हजारों कार्यकर्ताओं को तैयार किया और बहुजन आंदोलन को मजबूत संगठनात्मक ढांचा दिया. उनके नेतृत्व में कई सामाजिक और राजनीतिक अभियान चलाए गए.
बहुजन आंदोलन का व्यापक प्रभाव
कांशीराम के नेतृत्व में शुरू हुआ बहुजन आंदोलन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा. इस आंदोलन ने समाज के वंचित वर्गों में आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा की. लाखों लोगों ने इस आंदोलन से जुड़कर सामाजिक बदलाव की दिशा में काम किया.
आज भी जीवित हैं उनके विचार
कांशीराम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं. सामाजिक न्याय, समानता और राजनीतिक भागीदारी के उनके सिद्धांत आज भी बहुजन आंदोलन की आधारशिला बने हुए हैं.
कांशीराम जयंती के अवसर पर देश के कई हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए गए. BSP कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.
बहुजन राजनीति की विरासत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांशीराम ने भारतीय राजनीति में एक नई धारा की शुरुआत की. उन्होंने यह साबित किया कि सामाजिक रूप से वंचित समुदाय भी संगठित होकर राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं.
समाज में बराबरी का संदेश
कांशीराम का सपना एक ऐसे समाज का था जहां सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिले.उनका मानना था कि सामाजिक न्याय और लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकते हैं जब समाज के हर वर्ग को बराबरी का अधिकार मिले.इस तरह कांशीराम जयंती केवल एक नेता को याद करने का दिन नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का अवसर भी है.
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