Karnataka Social Media Ban: कर्नाटक सरकार ने बच्चों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है । बता दें कि अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने आज 6 मार्च को राज्य का बजट पेश करते हुए यह घोषणा की है। जिसमें सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए उठाया गया है।
जानकारी के लिए बता दें कि सरकार का कहना है कि आज के समय में बच्चे बहुत कम उम्र में ही स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। अब ऐसे में उनकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसी वजह से सरकार ने इस दिशा में सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता
मुख्यमंत्री Siddaramaiah का कहना है कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। जिसमें कई मामलों में यह देखा गया है कि बच्चे घंटों तक फोन में लगे रहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है और शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं।
एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में तनाव, चिंता और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग की लत भी बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। अब इन्हीं चिंताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने का फैसला किया है।
कुलपति सम्मेलन में भी उठाया गया था मुद्दा
जानकारी के अनुसार, इससे पहले पिछले महीने Bengaluru में आयोजित एक कुलपति सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। बता दें कि इस बैठक में मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से बच्चों और युवाओं में बढ़ती मोबाइल की लत पर राय मांगी थी। बैठक में मोबाइल और सोशल मीडिया के बच्चों की पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। कई शिक्षाविदों ने भी माना कि बच्चों को कम उम्र में सोशल मीडिया से दूर रखना जरूरी है।
सरकार AI तकनीक का भी करेगी इस्तेमाल
कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री Priyank Kharge ने इस मुद्दे पर पहले ही संकेत दे दिए थे कि राज्य सरकार युवाओं में सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग को काबू करने के लिए तकनीकी उपायों पर विचार कर रही है। जिसमें उन्होंने 30 जनवरी को विधानसभा में कहा था कि सरकार इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार कर रही है। इससे सोशल मीडिया के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
कई देशों में पहले से लागू हैं ऐसे नियम
सोशल मीडिया पर उम्र से जुड़ी पाबंदियां केवल भारत में ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों में भी लागू हैं। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है और दुनिया के कई देश इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। साथ ही,उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Finland में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर पहले से सख्त नियम लागू हैं। वहीं United Kingdom भी इस तरह के नियम लागू करने पर विचार कर रहा है। जिसमें खरगे का कहना है कि भारत में भी बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर गंभीर चर्चा की जा रही है।
स्टेकहोल्डर्स से भी की जा रही है चर्चा
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने बताया कि सरकार इस मुद्दे पर कई स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर रही है। इसमें शिक्षा विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, अभिभावक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। जिसमें सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों को कैसे बचाया जा सकता है और इसके लिए कौन-कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।

बच्चों की पढ़ाई और विकास पर असर
जानकारी के अनुसार,सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन को भी प्रभावित करता है। अब ऐसे में बच्चे पढ़ाई पर ध्यान देने की बजाय फोन और ऑनलाइन गेम्स में ज्यादा समय बिताने लगते हैं। इसके अलावा देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से उनकी नींद पर भी असर पड़ता है। नींद पूरी न होने की वजह से बच्चों में थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसी कारण कई शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने की मांग कर रहे थे।
अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
सरकार के इस अहम फैसले के साथ-साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखनी चाहिए और उन्हें पढ़ाई, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यदि बच्चे कम उम्र में ही सोशल मीडिया के आदी हो जाते हैं तो इससे उनका सामाजिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
सरकार जल्द ला सकती है नियम
कर्नाटक सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए जल्द ही विस्तृत नियम और दिशानिर्देश जारी कर सकती है। इसमें यह तय किया जाएगा कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों की उम्र कैसे सत्यापित करेंगी और नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस फैसले को सही तरीके से लागू किया जाता है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में किसानों को बड़ी राहत, इस योजना के तहत 2 लाख तक का कर्ज माफ करेगी फडणवीस सरकार, यहां जानें पूरी जानकारी



