PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आज अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित किया. यह कार्यक्रम का 132वां एपिसोड था और साल 2026 का तीसरा प्रसारण. हर बार की तरह इस बार भी पीएम मोदी ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों, सामाजिक जिम्मेदारियों और वैश्विक हालात पर खुलकर बात की. इस बार के संबोधन में सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने भारत के पड़ोस में चल रहे युद्ध और उससे पैदा हो रहे हालात का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यह समय सतर्क रहने का है, लेकिन घबराने का नहीं. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें.
युद्ध के बीच शांति और संयम की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के जिस हिस्से में इस समय संघर्ष चल रहा है, वह क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. ऐसे में वहां की स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई और कीमतों पर इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत को मजबूत किया है. यही वजह है कि देश इस चुनौतीपूर्ण समय में भी मजबूती से खड़ा है। लेकिन इसके बावजूद यह समय सावधानी बरतने का है.
प्रधानमंत्री ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि ऐसे समय में देश को एकजुट रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं, जो कि सही नहीं है. यह 140 करोड़ लोगों के हित से जुड़ा विषय है और इसमें किसी भी तरह की राजनीति की जगह नहीं होनी चाहिए.
अफवाहों से बचने की सख्त चेतावनी
पीएम मोदी ने खासतौर पर अफवाहों को लेकर लोगों को आगाह किया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर कई बार गलत जानकारी तेजी से फैलती है, जो समाज में डर और भ्रम पैदा कर सकती है.उन्होंने कहा, “अफवाह फैलाने वाले देश को नुकसान पहुंचाते हैं.” इसलिए जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और बिना पुष्टि के किसी भी खबर पर भरोसा न करें. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार सही जानकारी लोगों तक पहुंचा रही है और नागरिकों को उसी पर भरोसा करना चाहिए. यह संदेश खासतौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं.
जल संरक्षण पर दिया विशेष जोर
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण को लेकर भी देशवासियों को जागरूक किया. उन्होंने कहा कि गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और यह समय पानी बचाने के संकल्प को मजबूत करने का है. उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में जल संरक्षण के लिए देशभर में बड़े स्तर पर काम हुआ है. ‘जल संचय अभियान’ के तहत लगभग 50 लाख से ज्यादा जल संरचनाएं बनाई गई हैं. इससे गांवों और शहरों में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब लोग खुद आगे आकर इस दिशा में काम कर रहे हैं. कई जगहों पर पुराने तालाबों की सफाई हो रही है और बारिश के पानी को सहेजने के लिए नए प्रयास किए जा रहे हैं.
ऊर्जा संकट और भारत की तैयारी
प्रधानमंत्री ने वैश्विक ऊर्जा संकट पर भी विस्तार से बात की.उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण तेल उत्पादक क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे सप्लाई प्रभावित हो रही है. इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि देश ने अपने वैश्विक संबंधों को मजबूत किया है और विभिन्न देशों से सहयोग मिल रहा है. इसके साथ ही भारत ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर भी काम किया है, जिससे भविष्य में ऐसी परिस्थितियों का असर कम हो सके.
‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बार-बार “टीम इंडिया” की भावना का जिक्र किया.उन्होंने कहा कि जब देश एकजुट होकर काम करता है, तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे देशहित में काम करें और किसी भी तरह की गलत जानकारी को फैलने से रोकें.
‘मन की बात’ कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री और जनता के बीच सीधा संवाद का माध्यम बना हुआ है. इस कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री देश के विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा करते हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं. इस बार का एपिसोड खास इसलिए भी रहा क्योंकि इसमें वैश्विक संकट, देश की आंतरिक मजबूती और सामाजिक जिम्मेदारियों को एक साथ जोड़ा गया.
क्या सीख मिलती है इस संबोधन से?
प्रधानमंत्री के इस संबोधन से कई महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं. सबसे पहला, संकट के समय घबराने के बजाय संयम रखना जरूरी है. दूसरा, अफवाहों से दूर रहना और सही जानकारी पर भरोसा करना बेहद जरूरी है. तीसरा, जल संरक्षण जैसे मुद्दों पर व्यक्तिगत स्तर पर भी योगदान देना चाहिए. यह संबोधन हमें यह भी सिखाता है कि देश की ताकत केवल सरकार से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों से भी आती है.
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