Mcx Gold Silver prices: आज सोमवार 16 फरवरी को भारत में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वहीं, इस कीमतों में आई नरमी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। जिसमें घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर साफ नजर आया है। जिसमें एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और आगे दाम आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि, घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 589 रुपये यानी करीब 0.38 % गिरकर लगभग 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,630 रुपये यानी करीब 1.50 % टूटकर 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई।
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली है। जिसमें न्यूयॉर्क के कॉमेक्स (COMEX) बाजार में अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब 0.48 %गिरकर 5,021.99 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी लगभग 1.45 प्रतिशत टूटकर 76.83 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
पिछले हफ्ते की तेजी का असर
जानकारी के आधार पर पिछले हफ्ते सोना और चांदी तेजी से बढ़े थे। इसकी बड़ी वजह अमेरिका के महंगाई से जुड़े आंकड़े थे, जो उम्मीद से कमजोर रहे। इससे बाजार में यह उम्मीद बनी कि ब्याज दरों में कटौती हो सकती है। आमतौर पर ब्याज दर कम होने पर सोने-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन जब तेजी ज्यादा हो जाती है, तो बाजार खुद को संतुलित करता है। इसी वजह से इस हफ्ते कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई।
कम ट्रेडिंग वॉल्यूम से बढ़ा उतार-चढ़ाव
दरअसल, आज सोमवार को वैश्विक बाजार में कारोबार कम रहा है। जिसमें अमेरिका में प्रेसिडेंट्स डे की छुट्टी थी और चीन में लूनर न्यू ईयर के कारण ट्रेडिंग सीमित रही। जब बाजार में खरीद-बिक्री कम होती है, तो कीमतों में हलचल ज्यादा दिखाई देती है। यही कारण रहा कि दिशा स्पष्ट न होने के बावजूद दाम नीचे आ गए।
मुनाफावसूली बनी बड़ी वजह
बता दें कि जब किसी धातु की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो कई निवेशक ऊंचे स्तर पर अपना मुनाफा बुक कर लेते हैं। पिछले हफ्ते सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया था और चांदी में भी तेज उछाल आया था। ऐसे में निवेशकों ने मुनाफा निकालना बेहतर समझा, जिससे सोमवार को कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
अमेरिकी नीति पर टिकी बाजार की नजर
दरअसल, अब बाजार की नजर अमेरिका के महंगाई और खर्च से जुड़े नए आंकड़ों पर है। साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व और उसकी नीति निर्धारण समिति फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक की कार्यवाही भी अहम मानी जा रही है। अगर महंगाई कम रहती है, तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है, जो सोने-चांदी के लिए सकारात्मक संकेत होगा। लेकिन अगर महंगाई ज्यादा रही, तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
चीन में मजबूत मांग, भारत में सुस्ती
वैश्विक कमजोरी के बावजूद चीन में सोने की भौतिक मांग मजबूत बनी हुई है। शंघाई के वेयरहाउस में सोने का स्टॉक 100 टन से ज्यादा बताया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि वहां निवेश और खरीदारी जारी है। दूसरी ओर भारत में चांदी की घरेलू मांग थोड़ी कमजोर रही, जिसका असर MCX की कीमतों पर पड़ा।

आगे सोना-चांदी किस दिशा में जा सकते हैं?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब तक अमेरिका से नए आर्थिक संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वहीं, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी जारी रहती है, तो सोना करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास टिक सकता है। वहीं चांदी 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ सकती है। हालांकि लंबे समय के निवेशकों के लिए सोना अभी भी सुरक्षित निवेश माना जाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और ब्याज दरों में संभावित बदलाव जैसे कारक आगे कीमतों को फिर सहारा दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
- छोटे उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं।
- लंबी अवधि में सोना अभी भी सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
- अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और ब्याज दरें आगे की दिशा तय करेंगी।
- खरीदारी से पहले बाजार की चाल समझना जरूरी है।
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