उनके मुताबिक, उस वक्त दिवंगत कांग्रेस नेता एचकेएल भगत के नेतृत्व में ये सांसद रूस के एजेंट की तरह काम कर रहे थे।
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पत्रकार और संगठन भी एजेंडे में शामिल
निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि उस दौर में कई पत्रकार भी रूस के लिए काम कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने 16,000 से ज्यादा खबरें अपने पक्ष में छपवाईं। इतना ही नहीं, 1100 रूसी खुफिया एजेंट भारत में सक्रिय थे, जो सरकारी अफसरों, व्यापारिक संगठनों, कम्युनिस्ट पार्टियों और राय बनाने वाले लोगों को अपने साथ मिलाकर भारत की नीतियों पर असर डाल रहे थे।
सुभद्रा जोशी पर भी आरोप
दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस नेता सुभद्रा जोशी ने चुनाव के नाम पर जर्मन सरकार से पांच लाख रुपये लिए थे। चुनाव हारने के बाद उन्हें इंडो-जर्मन फोरम का अध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये देश गुलामों, एजेंटों और बिचौलियों का बनकर रह गया है?
दुबे ने कांग्रेस से जवाब मांगते हुए पूछा कि क्या इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए या नहीं?
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