Nitish Kumar Rajya Sabha Election: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर विरोध शुरू हो गया। जिसके बाद पटना स्थित JDU कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।वहीं, इस दौरान नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का घेराव कर अपनी नाराजगी जताई।जिसमें कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार की जनता ने विधानसभा चुनाव में वोट नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके चेहरे पर दिया था। ऐसे में उनका राज्यसभा जाने का फैसला कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं के खिलाफ है।
पटना में JDU कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री के राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद आज गुरुवार को पटना स्थित JDU मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पहुंच गए। जिसमें प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि पार्टी को बिहार में नेतृत्व की जरूरत है और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण भी हो गया। वहीं, कई कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा से सवाल पूछे और उनसे स्पष्ट जवाब देने की मांग की कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे तो बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को संभालने की बहुत कोशिश की और कार्यकर्ताओं को शांत कराया।
उमेश कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं को दिया आश्वासन
कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा खुद बाहर आए और उन्होंने प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं से बातचीत की। जिसमें उन्होंने कहा कि अभी तक नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है और फिलहाल सरकार अपने कार्यकाल के अनुसार काम कर रही है। साथ ही, कार्यकर्ताओं की भावनाओं का पार्टी में हमेशा सम्मान किया जाता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यकर्ताओं की सभी बातें और सुझाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंचाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के अंदर किसी तरह का मतभेद नहीं है और सभी नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।
नीतीश कुमार ने खुद दी राज्यसभा चुनाव लड़ने की जानकारी
जानकारी के लिए बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। बता दें कि उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की जनता ने उन पर भरोसा जताया है और उसी भरोसे की ताकत से उन्होंने राज्य की सेवा की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे राज्यसभा जाते हैं तो भी बिहार के विकास और नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। वहीं, नीतीश कुमार के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पैतृक गांव कल्याण बिगहा में भी नाराजगी
मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने की खबर का असर उनके पैतृक गांव कल्याण बिगहा में भी देखने को मिला है। जिसमें यहां के कई ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई। जिसमें गांव के लोगों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जनता ने NDA को वोट मुख्य रूप से नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा करके दिया था।जिसमें बिहार के लिए नीतीश कुमार से बेहतर और अनुभवी नेता कोई नहीं है, इसलिए उन्हें राज्य की राजनीति में सक्रिय रहना चाहिए। साथ ही, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से दूर होते हैं तो इससे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चा
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बीच एक और चर्चा तेज हो गई है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि उनके बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। जिसमें jDU के कुछ नेताओं ने संकेत दिया है कि निशांत कुमार पार्टी और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो यह जेडीयू के लिए नई पीढ़ी के नेतृत्व की शुरुआत हो सकती है।
बिहार की राजनीति में क्या होंगे इसके मायने
नीतीश कुमार का राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। बता दें कि पिछले करीब दो दशकों से वे राज्य की राजनीति के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।
उनके नेतृत्व में बिहार में कई विकास योजनाएं शुरू हुईं और उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला। ऐसे में अगर वे राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की सत्ता और जेडीयू की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि पार्टी इस फैसले को किस तरह संभालती है और बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

विपक्ष भी साध रहा निशाना
नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर लगातार बयान दे रहे हैं। जिसके बाद विपक्ष का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री खुद राज्यसभा जाना चाहते हैं तो उन्हें पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि यह फैसला बिहार की जनता के साथ विश्वासघात जैसा है क्योंकि जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था। हालांकि जेडीयू नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी है और पार्टी अपने फैसले सोच-समझकर लेती है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो सकती है। पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह इस फैसले को लेकर चर्चा जारी है। बता दें कि अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे या फिर राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नया नेतृत्व सामने आएगा।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्ते बिहार की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं।
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