भारत की संसद में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही लोकसभा में एक बड़ा मुद्दा चर्चा में आ सकता है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा स्पीकर Om Birla को उनके पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा हो सकती है. विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने स्पीकर के आचरण पर सवाल उठाते हुए यह प्रस्ताव पेश करने का नोटिस दिया है.
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू
संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाता है. इस वर्ष बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 तक चला था. इस दौरान 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश किया गया था. अब बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा. इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.
आज सदन में हो सकता है हंगामा
संसद के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही आज लोकसभा में हंगामे के आसार भी जताए जा रहे हैं. विपक्षी दलों ने स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव को लेकर सरकार और सत्ता पक्ष पर निशाना साधा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है.
कौन पेश करेगा प्रस्ताव?
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव कांग्रेस के तीन सांसदों द्वारा पेश किया जाएगा.इन सांसदों में शामिल हैं Mohammad Jawed, K. Suresh और Mallikarjun Ravi. इन सांसदों ने लोकसभा सचिवालय को प्रस्ताव का नोटिस दिया है.
प्रस्ताव की संसदीय प्रक्रिया क्या होती है?
लोकसभा में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव एक गंभीर संसदीय प्रक्रिया मानी जाती है. इसके लिए सदन के सदस्यों को पहले नोटिस देना होता है और उसके बाद नियमों के तहत इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाती है. यदि प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस पर मतदान भी कराया जा सकता है. हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है, क्योंकि स्पीकर का पद संसदीय लोकतंत्र में बेहद सम्मानजनक और संवैधानिक माना जाता है.
संसदीय कार्य मंत्री ने क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने बताया कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन में पेश किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी.
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन में निष्पक्षता बनाए नहीं रखी.विपक्षी सांसदों का कहना है कि स्पीकर ने कई मौकों पर विपक्ष के नेताओं को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया.इसके अलावा कुछ मामलों में विपक्षी महिला सांसदों पर कथित रूप से अनुचित टिप्पणियां करने का आरोप भी लगाया गया है. वहीं उनका, मानना है कि स्पीकर को सदन के सभी सदस्यों के प्रति समान व्यवहार करना चाहिए. लेकिन विपक्ष का आरोप है कि ओम बिरला ने कई फैसलों में सत्ताधारी दल का पक्ष लिया.प्रस्ताव में कहा गया है कि स्पीकर के कुछ फैसले ऐसे थे जो विपक्षी सांसदों के अधिकारों को कमजोर करते हैं.
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कई विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया था. विपक्ष का दावा है कि यह फैसला लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ था.हालांकि सरकार और सत्ता पक्ष इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं.
लोकसभा स्पीकर की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
लोकसभा स्पीकर संसद के निचले सदन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक होता है. स्पीकर की जिम्मेदारी होती है कि वह सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संचालित करें.साथ ही यह सुनिश्चित करें कि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिले.
सरकार का रुख
सरकार का कहना है कि लोकसभा की कार्यवाही नियमों के अनुसार चलती है और स्पीकर सदन के नियमों का पालन करते हुए निर्णय लेते हैं. सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक कारणों से यह मुद्दा उठा रहा है.
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे मुद्दे
भारतीय संसद के इतिहास में स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाए जाने की घटनाएं बहुत कम देखने को मिलती हैं. आमतौर पर यह तब होता है जब विपक्ष को लगता है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से नहीं चल रही है. हालांकि ज्यादातर मामलों में ऐसे प्रस्ताव राजनीतिक बहस का हिस्सा बनकर रह जाते हैं और आगे बढ़ना मुश्किल होता है.
विदेश नीति पर भी चर्चा संभव
संसद के इस सत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है. विदेश मंत्री S. Jaishankar पश्चिम एशिया की स्थिति और ईरान से जुड़े मुद्दों पर संसद में बयान दे सकते हैं. हाल के दिनों में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है.
संसद के एजेंडे में कई अहम मुद्दे
बजट सत्र के दूसरे चरण में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है. इसके अलावा विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय स्थिति जैसे मुद्दों को भी उठाने की तैयारी में है.
हालाँकि, लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव ने संसद के माहौल को और गर्म कर दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में संसद के अंदर राजनीतिक टकराव और बहस तेज हो सकती है.
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