Padmini Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. भगवान विष्णु को समर्पित यह दिन व्रत, पूजा और भक्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है. वहीं जब एकादशी अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में आती है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस बार पद्मिनी एकादशी का पर्व बेहद दुर्लभ संयोग में मनाया जा रहा है. करीब 3 साल बाद पुरुषोत्तम मास में यह एकादशी आई है, जबकि ज्येष्ठ मास में पद्मिनी एकादशी का ऐसा संयोग 27 साल बाद बना है. इस विशेष अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है. मान्यता है कि आज के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
क्या है पद्मिनी एकादशी?
पद्मिनी एकादशी अधिकमास के शुक्ल पक्ष में आने वाली विशेष एकादशी है. इसे कमला एकादशी और पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होती है. इसीलिए सनातन धर्म में अधिकमास की एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.
3 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है. इसी कारण पद्मिनी एकादशी का यह विशेष पर्व भी तीन साल बाद मनाया जा रहा है. इतना ही नहीं, इस बार यह एकादशी ज्येष्ठ मास में पड़ रही है, जो 27 वर्षों बाद बना अत्यंत दुर्लभ योग माना जा रहा है. इसके साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग इसे और भी शुभ बना रहा है.
सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व
सर्वार्थ सिद्धि योग को सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला शुभ योग माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से यह योग पूजा-पाठ, व्रत, दान और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस योग में भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. भगवान विष्णु की कृपा से धन-संपत्ति और वैभव की प्राप्ति होती है. विशेष रूप से अधिकमास में किया गया व्रत और दान कई गुना फल देता है. इसलिए भक्त इस दिन पूजा, भजन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं.
पद्मिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
धार्मिक पंचांग के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत आज पूरे श्रद्धाभाव से रखा जा रहा है.
शुभ योग
- सर्वार्थ सिद्धि योग
- रवि योग
पूजा का श्रेष्ठ समय
सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक पूजा का विशेष महत्व माना गया है.
पारण समय
द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद व्रत पारण किया जाएगा.
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
पद्मिनी एकादशी के दिन पूजा-विधि का विशेष महत्व माना गया है. शास्त्रों के अनुसार विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं.
पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और जल में गंगाजल मिलाएं.
- स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें.
- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें.
- चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें.
- भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं.
- पीले फूल, धूप, दीप और चंदन अर्पित करें.
- खीर, पंचामृत और फल का भोग लगाएं.
- तुलसी दल अवश्य अर्पित करें.
- पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें.
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें.
भगवान विष्णु के प्रिय मंत्र
धार्मिक मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है.
विष्णु मंत्र
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
श्रीहरि मंत्र
- “ॐ विष्णवे नमः”
लक्ष्मी-विष्णु मंत्र
- “ॐ श्रीं ह्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः”
इन मंत्रों का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है.
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक राजा संतान सुख से वंचित था. उसने ऋषियों के कहने पर अधिकमास की पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु की आराधना की। श्रीहरि की कृपा से राजा को संतान सुख प्राप्त हुआ और उसका जीवन सुखमय हो गया. तभी से इस एकादशी को अत्यंत फलदायी माना जाता है.
क्या करें और क्या न करें?
क्या करें
- भगवान विष्णु का ध्यान करें
- जरूरतमंदों को दान दें
- तुलसी पूजा करें
- सात्विक भोजन ग्रहण करें
क्या न करें
- क्रोध और विवाद से बचें
- तामसिक भोजन न करें
- झूठ और अपशब्दों से दूर रहें
अधिकमास क्यों होता है खास?
हिंदू पंचांग में चंद्र और सौर गणना के संतुलन के लिए लगभग हर तीन साल में अधिकमास आता है. इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस दौरान किए गए पुण्य कार्य, पूजा और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है.
भक्तों में दिखा उत्साह
देशभर के मंदिरों में आज पद्मिनी एकादशी को लेकर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. कई स्थानों पर विष्णु सहस्रनाम पाठ, भजन-कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन हो रहा है. भक्त सुबह से ही मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं. घरों में भी श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना कर रहे हैं.
ज्योतिषाचार्यों की सलाह
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि आज का दिन आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ है. विशेष रूप से जिन लोगों के जीवन में आर्थिक संकट, मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याएं चल रही हैं, उन्हें आज भगवान विष्णु की पूजा और दान जरूर करना चाहिए.
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