PM Modi High Level Meeting: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी सिलसिले में आज रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने देश में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम हाई लेवल मीटिंग (High level Meeting) की। दरअसल, आज की यह बैठक उनके आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। इस दौरान बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और उच्च अधिकारी शामिल हुए।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की इस मुख्य बैठक में कई जरूरी चीजों पर फोकस किया गया। जहां कच्चे तेल, पेट्रोलियम, गैस, बिजली और उर्वरक की सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है। ऐसे में आइए यहां जानें इस पीएम मोदी की आज की हाई लेवल मीटिंग में क्या कुछ खास रहा।
पीएम की बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
आज की पीएम मोदी आज की इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई बड़े चेहरे मौजूद हैं। इसके अलावा कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा और श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया भी इस बैठक में शामिल रहे। बताया जा रहा है कि सरकार के लिए यह मीटिंग इसलिए अहम है क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की अर्थव्यवस्था (Country’s Economy) और आम जनता की जेब से जुड़ा हुआ है।
क्या है बैठक का मुख्य एजेंडा?
पीएम मोदी की आज की इस बैठक से सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर भारत की सप्लाई चेन पर कम से कम पड़े, ताकि देश की आर्थव्यवस्था से लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस बैठक में इन मुद्दों पर खास चर्चा हुई, जो कुछ इस प्रकार से हैं।
- कच्चे तेल की उपलब्धता और स्टॉक
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर संभावित असर
- एलपीजी गैस की सप्लाई
- बिजली उत्पादन पर प्रभाव
- उर्वरक (फर्टिलाइज़र) की उपलब्धता
सरकार यह भी देख रही है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वैकल्पिक सप्लाई रूट और स्रोत क्या हो सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा संकट
मिडिल ईस्ट में चल रहे काफी समय से तनाव का सबसे ज्यादा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई (Global Oil Supply) का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
खबरों की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार युद्ध जैसे हालात के चलते इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही काफी हद तक प्रभावित हुई है। इसी बीच कई तेल टैंकर बीच समुद्र में फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। यह भी बताया जा रहा है कि अगर तनाव की यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह का तनाव सीधे भारत को प्रभावित करता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि हाल के दिनों में कुछ भारतीय जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति मिल चुकी है। फिर भी अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसके असर इस तरह दिख सकते हैं:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
- एलपीजी सिलेंडर महंगा हो सकता है।
- बिजली उत्पादन की लागत बढ़ना शुरू हो जाएगी।
- खाद (फर्टिलाइज़र) महंगा होगा।
अगर ये सभी चीजों महंगी होती है, तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है।
सरकार की क्या है तैयारी?
भारत सरकार इस संकट से निपटने के लिए पहले से ही बैकअप प्लान तैयार कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार, आज की इस बैठक में इन विकल्पों पर चर्चा हो सकती है:
- दूसरे देशों से तेल आयात बढ़ाना है।
- स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल किया गया है।
- घरेलू उत्पादन बढ़ाने के विकल्प है।
- कीमतों को नियंत्रित रखने के उपाय है।
सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में किसी भी तरह की किल्लत न हो और जरूरी सेवाएं बिना रुकावट चलती रहें।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेल पर निर्भर देशों के लिए यह एक बड़ा संकट बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले ही कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
देखा जाए तो मिडिल ईस्ट का संकट (Middle East Crisis) सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक समस्या बनता जा रहा है। ऐसे में पीएम मोदी की यह हाई लेवल मीटिंग (PM Modi high level meeting) बेहद अहम साबित हो सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार का फोकस साफ है कि देश में तेल, गैस, बिजली और खाद की सप्लाई को हर हाल में बनी रहे। साथ ही, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हालात किस दिशा में जाते हैं और इसका असर आम जनता पर कितना होगा।
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