PM Modi Israel Visit: भारत और इजरायल के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार 25 फरवरी को दो दिन के राजकीय दौरे पर इजरायल पहुंच रहे हैं. यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पीएम मोदी इजरायल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे.दुनिया के बहुत कम नेताओं को यह सम्मान मिलता है, इसलिए यह न सिर्फ भारत के लिए बल्कि भारत-इजरायल रिश्तों के लिए भी एक बड़ा कूटनीतिक पल माना जा रहा है.
इजरायली समय के अनुसार पीएम मोदी दोपहर 12:45 बजे बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरेंगे, जहां इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू उनका औपचारिक स्वागत करेंगे. यह पीएम मोदी का दूसरा इजरायल दौरा है. इससे पहले भी उनकी यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी थी. इस बार दौरे से रक्षा, तकनीक, कृषि, जल प्रबंधन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत, प्रोटोकॉल के तहत सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए इजरायल ने विशेष प्रोटोकॉल तैयार किया है. बेन गुरियन एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा. भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि भी पीएम मोदी का स्वागत करेंगे.विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए बेहद अहम है.
Knesset में संबोधन,क्यों है यह इतना खास?
इजरायल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करना किसी भी विदेशी नेता के लिए बड़ी बात मानी जाती है.पीएम मोदी पहले भारतीय नेता होंगे जिन्हें यह सम्मान मिलेगा.अपने संबोधन में वे भारत-इजरायल रिश्तों की ऐतिहासिक यात्रा, लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार, सुरक्षा सहयोग और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर बात कर सकते हैं. राजनयिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह भाषण सिर्फ औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसमें भविष्य के रोडमैप का खाका भी पेश किया जा सकता है.इससे दोनों देशों के रिश्तों को राजनीतिक स्तर पर नई मजबूती मिलेगी.
नेतन्याहू और राष्ट्रपति हर्जोग से मुलाकात
दो दिवसीय दौरे के दौरान पीएम मोदी की इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से द्विपक्षीय बैठकें होंगी.इन बैठकों में भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के सहयोग पर चर्चा होगी.
इन बैठकों में जिन प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस रहेगा, उनमें शामिल हैं:
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम
- कृषि तकनीक और जल प्रबंधन
- व्यापार और निवेश
- पीपुल-टू-पीपुल संपर्क
दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, जिनमें मध्य-पूर्व की स्थिति, वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे विषय शामिल हो सकते हैं.
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर क्या हो सकती है बात?
भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है. इजरायल भारत को रक्षा तकनीक, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और निगरानी उपकरणों की आपूर्ति करता रहा है. इस दौरे के दौरान दोनों देश संयुक्त रक्षा उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में नई साझेदारियों पर चर्चा कर सकते हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात में भारत-इजरायल रक्षा सहयोग और भी अहम हो गया है. इससे भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती मिल सकती है.
कृषि और जल प्रबंधन,भारत के लिए क्यों अहम?
इजरायल को दुनिया में जल प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीक के लिए जाना जाता है. ड्रिप इरिगेशन, वाटर रिसाइक्लिंग और स्मार्ट फार्मिंग में इजरायल की तकनीक भारत के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है.पहले से ही भारत के कई राज्यों में इजरायली तकनीक से कृषि परियोजनाएं चल रही हैं.
इस दौरे में किसानों की आय बढ़ाने, जल संकट से निपटने और क्लाइमेट-रेजिलिएंट खेती पर सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावना है. इससे ग्रामीण भारत को सीधा फायदा मिल सकता है.
टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सहयोग
इजरायल को ‘स्टार्टअप नेशन’ कहा जाता है. टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, AI और हेल्थ-टेक जैसे क्षेत्रों में इजरायल की कंपनियां वैश्विक स्तर पर अग्रणी हैं. पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारतीय और इजरायली स्टार्टअप्स के बीच साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने से नई नौकरियां पैदा होंगी, इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को वैश्विक अवसर मिलेंगे.
व्यापार और निवेश की नई संभावनाएं
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी इसकी काफी संभावनाएं बाकी हैं. पीएम मोदी के दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार समझौतों, निवेश सहयोग और संयुक्त उद्यमों को नई गति मिल सकती है. व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक, टेक्नोलॉजी, फार्मा, एग्री-प्रोसेसिंग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं.
भारतीय समुदाय से मुलाकात, सांस्कृतिक जुड़ाव
पीएम मोदी इजरायल में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी मुलाकात कर सकते हैं.प्रवासी भारतीयों के लिए यह दौरा भावनात्मक रूप से भी खास माना जा रहा है. ऐसे आयोजनों के जरिए दोनों देशों के बीच लोगों का जुड़ाव और मजबूत होता है.
वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
पीएम मोदी का नेसेट में संबोधन और शीर्ष नेताओं से मुलाकात यह दिखाती है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत की Active Diplomacy का उदाहरण है, जहां भारत रणनीतिक साझेदारियों को गहराई दे रहा है.
Read Related News : डिजिटल कंटेंट पर सख्ती,अश्लील कंटेंट दिखाने वाले 5 OTT ऐप्स पर प्रतिबंध



