President Murmu Mathura Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों उत्तर प्रदेश के ब्रज में तीन दिवसीय दौरे पर हैं। दरअसल, उनका यह दौरा 19 मार्च से शुरू होकर 21 मार्च 2026 तक जारी रहेगा। इस दौरान राष्ट्रपति ने वृंदावन पहुंचकर संत प्रेमानंद महाराज से भी मुलाकात की। उनकी इस यात्रा का मकसद खासतौर पर धार्मिक स्थलों के दर्शन करना, संतों से मुलाकात और सामाजिक कार्यों से जुड़े कार्यक्रमों में अपना भागिदारी दर्ज करना है, जिससे वह भी नवरात्रि के इन शुभ दिनों (Navratri Auspicious Days) में धर्मिक कार्यो में अपना योगदान दे सके।
बता दें कि आज राष्ट्रपति के दौरा का दूसरा दिन है। आज का दिन उन्होंने उन्होंने वृंदावन पहुंचकर संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की, जो धार्मिक दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राष्ट्रपति का आश्रम में हुआ भव्य स्वागत
अपने दौरे के दौरान जब राष्ट्रपति राधा केली कुंज आश्रम (Radha Keli Kunj Ashram) पहुंचीं तो उनका पारंपरिक तरीके के साथ और भव्य स्वागत किया गया। जहां पर संत प्रेमानंद महाराज ने स्वयं “राधे-राधे” कहकर उनका अभिनंदन भी किया।
वही, आश्रम के शिष्यों ने राष्ट्रपति को दुपट्टा ओढ़ाया, माला पहनाई और प्रसाद भेंट किया। इस दौरान राष्ट्रपति का परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आत्मीय हो गया।
27 मिनट तक राष्ट्रपति तक की खास मुलाकात
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति और संत प्रेमानंद महाराज के बीच करीब 27 मिनट तक विशेष बातचीत हुई। यह चर्चा पूरी तरह निजी और आध्यात्मिक बताई जा रही है। उनकी चर्चा के बीच की बस कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई है, जिसमें राष्ट्रपति प्रेमानंद जी से मिलकर बहुत ही खुश दिखाई दे रही है। खबरों के अनुसार, इस दौरान दोनों के बीच अध्यात्म, सेवा, मानव कल्याण और जीवन मूल्यों पर गहन संवाद हुआ। संत प्रेमानंद महाराज ने नाम जप और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “ईश्वर का नाम ही जीवन के उद्धार का सबसे सरल मार्ग है।” राष्ट्रपति मुर्मू ने भी संत के सरल जीवन और उनके आध्यात्मिक विचारों की काफी अधिक सराहना की।
सीमित लोगों की मौजूदगी में हुई बैठक
राष्ट्रपति और प्रेमानंद महाराज जी की यह मुलाकात पूरी तरह से गोपनीय और शांत वातावरण में आयोजित की गई थी। जब यह बैठक हुई, तब कुटिया के अंदर केवल राष्ट्रपति, उनके परिवार के सदस्य और संत के करीबी शिष्य ही मौजूद थे। इस दौरान राष्ट्रपति ने संत के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा।
प्रेम मंदिर और अन्य स्थलों के दर्शन
अपने ब्रज दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने प्रेम मंदिर (Prem Mandir) में भी दर्शन किए। यहां उन्होंने मंदिर के प्रथम तल पर स्थित कृपालु महाराज के विग्रह और श्री सीता-राम युगल के दर्शन किए। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने गर्भगृह के बाहर परिक्रमा की और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्हें स्मृति चिन्ह और धार्मिक साहित्य भी भेंट किए।
राष्ट्रपित की सुरक्षा के रहे कड़े इंतजा
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे वृंदावन में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। देखा जाए तो लगभग पूरे ब्रज क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड (Alert Mode) में नजर आई। मुख्य मंदिरों और आश्रमों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। इसके अलावा, वृंदावन में बंदरों की समस्या को देखते हुए विशेष टीम भी तैनात की गई थी, ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

राष्ट्रपति पहले भी कर चुकी हैं दौरा
यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वृंदावन आई हैं। इससे पहले वह 25 सितंबर 2025 को भी यहां आ चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने निधिवन और बांकेबिहारी मंदिर (Nidhivan and Banke Bihari Temple) में पूजा-अर्चना की। इसके अलावा उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मंदिरों में भी दर्शन किए थे। हालांकि, उस समय उनका परिवार उनके साथ नहीं था।
ब्रज क्षेत्र है अध्यात्म और प्रशासन का संगम
राष्ट्रपति का यह दौरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं। अपने प्रवास के दौरान वह रामकृष्ण मिशन (Ramakrishna Mission) द्वारा संचालित कैंसर ब्लॉक का उद्घाटन भी करेंगी। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
आस्था और संवाद का संतुलित उदाहरण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और संत प्रेमानंद महाराज की यह मुलाकात आस्था और संवाद का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आई है। एक ओर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन महिला और दूसरी ओर संत परंपरा के प्रतिनिधि-दोनों के बीच हुई यह चर्चा समाज के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। ऐसे में भारत में इस मुलाकात ने यह भी दर्शाया है कि आधुनिक शासन व्यवस्था और आध्यात्मिक परंपराएं साथ मिलकर समाज को दिशा देने का काम कर सकती हैं।



