Punch The Monkey: जापान के एक चिड़ियाघर में रहने वाले सात महीने के नन्हे मकाक बंदर ‘पंच’ Punch The Monkey की कहानी इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. कोई उसे देखकर मुस्कुरा रहा है, तो कोई भावुक हो रहा है.वजह है पंच का अकेलापन और उसकी मासूम हरकतें. मां के प्यार से दूर यह छोटा बंदर हर समय एक सॉफ्ट टॉय को अपने सीने से लगाए रहता है. यह नज़ारा लोगों के दिल को छू रहा है. कई यूज़र्स इसे मां की ममता और सुरक्षा की तलाश से जोड़कर देख रहे हैं। पंच की कहानी सिर्फ एक क्यूट वायरल वीडियो नहीं है, बल्कि इसमें भावनाएं भी हैं और जानवरों के संरक्षण से जुड़ा एक बड़ा संदेश भी छिपा है.
सोशल मीडिया पर छाया ‘Punch The Monkey’
पंच की तस्वीरें और वीडियो जैसे ही सामने आए, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कुछ लोग लिख रहे हैं “यह बच्चा सिर्फ एक बंदर नहीं, बल्कि एक मासूम दिल है.”तो कुछ यूज़र्स कह रहे हैं “मां का प्यार हर जीव के लिए कितना जरूरी होता है, पंच हमें यह सिखा रहा है.”
ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर पंच के वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं.लोग उसके हर छोटे मूवमेंट पर रिएक्शन दे रहे हैं. कई यूज़र्स ने उसके लिए खिलौने भेजने की इच्छा भी जताई है.
Google भी हुआ ‘Punch’ का फैन
पंच की लोकप्रियता यहीं नहीं रुकी। बताया जा रहा है कि उसके वीडियो और तस्वीरें गूगल ट्रेंड्स में भी ट्रेंड करने लगीं. “Punch The Monkey”, “Japan Zoo Monkey Punch” जैसे कीवर्ड्स सर्च में तेजी से ऊपर आने लगे. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंच की स्टोरी को गूगल के कुछ क्यूरेशन प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया एल्गोरिदम में खास तवज्जो मिली.यानी पंच सिर्फ सोशल मीडिया यूज़र्स ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी चर्चा का विषय बन चुका है.
क्या है पंच की असली कहानी?
पंच जापान के Ichikawa City Zoo में रहता है.वह एक Japanese Macaque प्रजाति का बंदर है. चिड़ियाघर के अधिकारियों के मुताबिक पंच का जन्म सामान्य तरीके से हुआ था. लेकिन जन्म के कुछ समय बाद उसकी मां ने उसे स्वीकार नहीं किया. मां के इनकार करने के बाद पंच को अलग रखना पड़ा.
इसके बाद zoo के कर्मचारियों ने उसे हाथों से पालना शुरू किया.
मां से दूर होने के कारण पंच भावनात्मक रूप से काफी कमजोर हो गया.यही वजह है कि उसे एक सॉफ्ट टॉय दिया गया ताकि वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सके.
सॉफ्ट टॉय से पंच का खास रिश्ता
चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने देखा कि पंच जब भी अकेला महसूस करता है, तो वह खिलौने से चिपक जाता है. वह सोते वक्त भी उसे नहीं छोड़ता.
कभी-कभी वह खिलौने को अपने चेहरे से लगाकर बैठा रहता है, मानो किसी अपने से सुकून ले रहा हो.
एक केयरटेकर ने बताया,“पंच को मां की कमी बहुत खलती है.सॉफ्ट टॉय उसके लिए मां का विकल्प बन गया है. इससे उसे भावनात्मक सुरक्षा मिलती है.”
यही दृश्य लोगों को सबसे ज्यादा भावुक कर रहा है.
क्यों छोड़ देती हैं मां अपने बच्चों को?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ मामलों में बंदर अपनी संतानों को छोड़ देते हैं. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. मां का अनुभवहीन होना, तनाव या डर, वातावरण में बदलाव, भीड़ या शोर और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें.
जापानी मकाक आमतौर पर अपने बच्चों का ख्याल रखते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में ऐसा व्यवहार देखने को मिलता है.
चिड़ियाघर की भूमिका पर सवाल?
पंच की कहानी वायरल होने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि, क्या चिड़ियाघर का माहौल जानवरों के लिए सही है? क्या मां और बच्चे को अलग करना जरूरी था? इस पर zoo प्रशासन ने सफाई दी कि मां ने पंच को स्वीकार नहीं किया और पंच की सुरक्षा के लिए उसे अलग करना जरूरी था. विशेषज्ञों की सलाह पर उसे हाथों से पाला जा रहा है. वहीं, चिड़ियाघर का दावा है कि punch पूरी तरह सुरक्षित है और उसे जरूरी देखभाल मिल रही है.
पशु संरक्षण का बड़ा संदेश
पंच की कहानी सिर्फ भावुक नहीं है, बल्कि यह जानवरों के संरक्षण पर भी सवाल खड़े करती है.
जंगली जीव विशेषज्ञों का मानना है कि:
- जानवरों के लिए प्राकृतिक वातावरण सबसे बेहतर होता है
- चिड़ियाघरों में उन्हें मानसिक तनाव हो सकता है
- मां-बच्चे के रिश्ते पर इसका असर पड़ता है
हालांकि, कुछ मामलों में चिड़ियाघर ही जानवरों की जान बचाने का एकमात्र रास्ता बनते हैं.
दुनिया भर से मिल रहा प्यार
पंच को सिर्फ जापान ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों से प्यार मिल रहा है. भारत, अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया से लोग उसके वीडियो शेयर कर रहे हैं.
कुछ एनिमल लवर्स ने ऑनलाइन कमेंट किया, “काश हम पंच को गले लगा सकते.” कुछ यूज़र्स ने चिड़ियाघर से अपील की है कि पंच के लिए एक साथी बंदर रखा जाए ताकि वह अकेला महसूस न करे.
पंच का भविष्य क्या होगा?
zoo अधिकारियों का कहना है कि पंच को धीरे-धीरे अन्य बंदरों के साथ घुलने-मिलने की ट्रेनिंग दी जाएगी. विशेषज्ञ उसकी मानसिक स्थिति पर नजर रख रहे हैं. जब वह मजबूत हो जाएगा, तो उसे अपने झुंड में शामिल किया जाएगा. हालांकि, यह प्रक्रिया धीरे-धीरे और सावधानी से की जाएगी ताकि पंच को कोई मानसिक आघात न लगे.
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