Qatar Airspace Closed: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव के बीच बड़ा कदम उठाते हुए कतर ने अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। बता दें कि इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। जिसके भारत की प्रमुख एयरलाइंस कंपनियों IndiGo और Akasa Air ने खाड़ी देशों के लिए अपनी कई फ्लाइट्स 7 मार्च तक रद्द करने की घोषणा की है।
जानकारी के लिए बता दें कि हवाई क्षेत्र बंद होने से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं। खासतौर पर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
अकासा एयर ने जारी किया आधिकारिक बयान
अकासा एयर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए कहा है कि 3 मार्च 2026 को अबू धाबी, दोहा, जेद्दा, कुवैत और रियाद से आने-जाने वाली सभी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित रहेंगी। जिसके बाद एयरलाइन ने कहा है कि जिन यात्रियों ने 7 मार्च तक की बुकिंग कर रखी है, वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपनी टिकट रीशेड्यूल कर सकते हैं या फिर पूरा रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।
साथ ही, कंपनी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा पहले है और हालात ठीक होने तक संचालन फिर से शुरू नहीं किया जाएगा।
इंडिगो ने भी रोकी मिडिल ईस्ट की सेवाएं
दरअसल, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में से एक इंडिगो ने भी एहतियात बरतते हुए मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र से गुजरने वाली अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। जिसमें इंडिगो ने घोषणा की है कि 28 फरवरी तक बुक किए गए टिकटों पर 7 मार्च तक यात्रा के लिए यात्रियों को फुल रिफंड या बिना शुल्क के तारीख बदलने की सुविधा दी जाएगी। साथ ही, कंपनी का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह फैसला यात्रियों और क्रू मेंबर की सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है।
कतर एयरवेज का बड़ा फैसला
कतर द्वारा एयरस्पेस बंद किए जाने के बाद राष्ट्रीय एयरलाइन Qatar Airways ने भी अपनी सभी फ्लाइट्स को अस्थायी रूप से स्थगित कर दी हैं। जिसमें एयरलाइन ने आधिकारिक बयान में कहा कि नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अगले आदेश तक सभी सेवाएं बंद रहेंगी। कंपनी ने भी कहा है कि जब तक कतरी एयरस्पेस सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक परिचालन दोबारा शुरू करना संभव नहीं है। एयरलाइन के अनुसार अगला अपडेट 3 मार्च को दोहा समयानुसार सुबह 9 बजे जारी किया जाएगा।
हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे
बता दें कि हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण कतर के रास्ते यूरोप और एशिया के बीच यात्रा करने वाले हजारों अंतरराष्ट्रीय यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर फंस गए हैं। जिसमें कतर लंबे समय से यूरोप-एशिया रूट का खास ट्रांजिट हब रहा है। वहीं,एयरस्पेस बंद होने से लंबी दूरी की उड़ानों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे यात्रा समय बढ़ गया है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और विमानन उद्योग पर असर
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक विमानन क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। जिसमें कई एयरलाइंस जोखिम भरे इलाकों से गुजरने से बच रही हैं। बताया जा रहा है कि इसका सीधा असर ईंधन की खपत और परिचालन लागत पर पड़ रहा है। लंबा रूट अपनाने के कारण फ्लाइट टाइम बढ़ रहा है और एयरलाइंस का खर्च भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
भारतीय यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता
जानकारी के लिए बता दें कि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में लोग भारत और खाड़ी देशों के बीच यात्रा करते हैं। अब ऐसे में एयरस्पेस बंद होने और उड़ानों के रद्द होने से सबसे ज्यादा परेशानी इन्हीं यात्रियों को हो रही है। जिससे कई लोग अपनी छुट्टियों या पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए यात्रा की योजना बना चुके थे, लेकिन अब उनकी योजनाएं अनिश्चित हो गई हैं।

एयरलाइंस की अपील
एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लें। साथ ही, यात्री उनकी पहले ऑफिशियल वेबसाइट, कस्टमर केयर या मोबाइल ऐप के जरिए से अपडेट चेक कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर
कतर के एयरस्पेस बंद होने से केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की एयरलाइंस प्रभावित हुई हैं। यूरोप से एशिया और ऑस्ट्रेलिया जाने वाली कई उड़ानों को नया मार्ग अपनाना पड़ रहा है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर स्थिति जल्द ठीक नहीं होती है तो वैश्विक हवाई यातायात पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
अब आगे क्या होगा
जानकारी के मुताबिक, फिलहाल सभी की नजरें कतर सरकार और नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अगले निर्णय पर टिकी हैं। जिसमें कल 3 मार्च को आने वाला ऑफिशियल अपडेट यह तय करेगा कि एयरस्पेस कब तक बंद रहेगा।
वहीं, जब तक हालात ठीक नहीं होते, तब तक एयरलाइंस कंपनियां अपने संचालन में बदलाव करती रहेंगी।
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