अयोध्या में रामलला का ‘सूर्य तिलक’: राम नवमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में आज शुक्रवार को एक बेहद दिव्य और अद्भुत दृश्य देखने को मिला है। बता दें कि यह दोपहर ठीक 12 बजे भगवान रामलला का सूर्यतिलक किया गया, जिसमें सूर्य की किरणें सीधे उनके ललाट पर पड़ीं और तिलक के रूप में चमक उठीं। साथ ही, यह दृश्य इतना मनमोहक था कि मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। जिसके चारों ओर “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारे गूंज उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
चार मिनट तक चला दिव्य सूर्यतिलक
रामलला के सूर्यतिलक की यह प्रक्रिया लगभग चार मिनट तक चली। इस दौरान सूर्य की किरणें विशेष वैज्ञानिक तकनीक के जरिए मंदिर के शिखर से होते हुए गर्भगृह में पहुंचीं और भगवान के ललाट पर एक गोलाकार तिलक के रूप में दिखाई दीं। जिसमें करीब 75 मिमी का यह तिलक बेहद स्पष्ट और चमकदार नजर आया। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, मंदिर में मौजूद श्रद्धालु खुशी से झूम उठे और भक्ति में लीन हो गए।
पीले वस्त्रों में सजे रामलला
इस खास अवसर पर रामलला को पीले रंग के सुंदर वस्त्र पहनाए गए थे, जो सूर्यतिलक के साथ बेहद आकर्षक लग रहे थे। वहीं, भगवान की मनमोहक छवि ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। गर्भगृह में इस दौरान 14 विशेष पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सूर्यतिलक के दौरान सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। वीआईपी पास से एंट्री सूर्यतिलक से आधे घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक बंद रखी गई थी, ताकि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। इसके अलावा मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहे और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया गया।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु
राम नवमी के इस खास अवसर पर अयोध्या में देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे। हर कोई इस अलौकिक क्षण का साक्षी बनना चाहता था। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी थीं। जैसे ही सूर्यतिलक का समय नजदीक आया, सभी श्रद्धालु बेसब्री से उस दिव्य पल का इंतजार करने लगे।

पीएम नरेंद्र मोदी ने देखा लाइव प्रसारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रामलला के सूर्यतिलक का लाइव प्रसारण देखा। नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बैठे प्रधानमंत्री ने इस दिव्य दृश्य को टीवी पर देखा और इस अवसर पर तालियां बजाईं। सूर्यतिलक के दौरान उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान रामलला को प्रणाम भी किया। साथ ही वे इस दौरान संसद की कार्यवाही पर भी नजर बनाए हुए थे।
मंदिर पर फहराया गया केसरिया ध्वज
राम नवमी से पहले चैत्र नवरात्रि अष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित सूर्य मंदिर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ ध्वजारोहण किया गया। मंदिर के शिखर पर ‘ॐ’ का प्रतीक अंकित केसरिया ध्वज फहराया गया, जिसने पूरे परिसर को धार्मिक ऊर्जा से भर दिया। यह दृश्य भी श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहा।
कैसे होती है सूर्यतिलक की प्रक्रिया?
जानकारी के लिए बता दें कि रामलला के सूर्यतिलक के पीछे एक खास वैज्ञानिक और पारंपरिक तकनीक का उपयोग किया गया है। दरअसल इस प्रक्रिया में सूर्य की किरणें मंदिर के ऊपरी हिस्से से पाइप के माध्यम से गर्भगृह तक लाई जाती हैं। इसके बाद दर्पणों (मिरर) की मदद से इन किरणों को परावर्तित किया जाता है, जिससे वे सीधे भगवान के ललाट पर केंद्रित होती हैं। वहीं इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर साल राम नवमी के दिन ठीक दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें भगवान के माथे पर तिलक के रूप में दिखाई दें।
भक्तों में दिखा उत्साह और भक्ति
बता दें कि जैसे ही सूर्यतिलक हुआ, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जिसमें लोग भक्ति में डूबकर जयकारे लगाने लगे और भगवान की आरती में शामिल हुए। घंटों की तेज आवाज, मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों के बीच पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। जिसमें कई श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू भी दिखाई दिए, जो इस दिव्य पल की अनुभूति को दर्शा रहे थे।
राम नवमी का महत्व
राम नवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। अयोध्या में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसे भगवान राम की जन्मभूमि माना जाता है।



