Ramadan 2026: इस्लाम के पवित्र महीने Ramadan में दुनिया भर के मुसलमान रोजा रखकर इबादत और अल्लाह की बंदगी में लगे हुए हैं. जैसे-जैसे रमजान अपने अंतिम दिनों की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इबादत, दुआ और नेक कामों की अहमियत और भी बढ़ जाती है.आज यानी 16 मार्च 2026 को रमजान का 26वां रोजा रखा जा रहा है. इस दिन रोजेदार सुबह सहरी करके रोजे की शुरुआत करेंगे और शाम को इफ्तार कर रोजा खोलेंगे. माना जाता है कि रमजान के आखिरी दस दिन बेहद खास होते हैं क्योंकि इन्हीं दिनों में Laylat al-Qadr यानी शब-ए-कद्र की रात आती है.
छब्बीसवें रोजे का महत्व
रमजान का 26वां रोजा खास महत्व रखता है. इसकी वजह यह है कि 26वें रोजे की रात के बाद रमजान की 27वीं रात आती है, जिसे इस्लाम में शब-ए-कद्र या लैलातुल कद्र कहा जाता है. इस रात को हजार महीनों से बेहतर माना गया है और माना जाता है कि इस रात की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है.
रमजान के आखिरी दिनों में बढ़ती है इबादत
रमजान के आखिरी दस दिनों में मुसलमान ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं. इन दिनों में लोग कुरान की तिलावत, नमाज, जिक्र और दुआ में अधिक समय बिताते हैं. कई लोग मस्जिदों में एतिकाफ भी करते हैं, जिसमें वे दुनिया के कामों से दूर रहकर केवल इबादत में समय बिताते हैं.
सहरी और इफ्तार का महत्व
रमजान में रोजा रखने की शुरुआत सुबह सहरी (सेहरी) से होती है. सहरी वह भोजन होता है जो फज्र की नमाज से पहले खाया जाता है. इसके बाद रोजेदार पूरे दिन कुछ भी खाने-पीने से परहेज करते हैं. शाम को सूर्यास्त के समय रोजा इफ्तार से खोला जाता है.
इफ्तार में खजूर और पानी की परंपरा
इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा खोलते समय सबसे पहले खजूर और पानी से इफ्तार करना सुन्नत माना जाता है. इसके बाद लोग नमाज अदा करते हैं और फिर भोजन करते हैं.
रमजान के महीने में कई जगहों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन भी किया जाता है. मस्जिदों, घरों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से आयोजित इफ्तार कार्यक्रम भाईचारे और एकता का प्रतीक माने जाते हैं.
प्रमुख शहरों के सहरी और इफ्तार का समय (16 मार्च 2026)
रोजेदारों के लिए सहरी और इफ्तार का सही समय जानना बहुत जरूरी होता है। नीचे कुछ प्रमुख शहरों के अनुमानित समय दिए गए हैं:
दिल्ली
- सहरी: लगभग 5:05 सुबह
- इफ्तार: लगभग 6:30 शाम
मुंबई
- सहरी: लगभग 5:20 सुबह
- इफ्तार: लगभग 6:45 शाम
हैदराबाद
- सहरी: लगभग 5:10 सुबह
- इफ्तार: लगभग 6:35 शाम
कानपुर
- सहरी: लगभग 5:00 सुबह
- इफ्तार: लगभग 6:25 शाम
चेन्नई
- सहरी: लगभग 5:05 सुबह
- इफ्तार: लगभग 6:20 शाम
चांद के दीदार पर निर्भर करेगी ईद
इस्लामिक कैलेंडर पूरी तरह से चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है. इसलिए रमजान के खत्म होने और अगले महीने Shawwal की शुरुआत का फैसला चांद देखने के बाद ही किया जाता है.
29 या 30 रोजे हो सकते हैं
यदि 19 मार्च को शाम के समय शव्वाल का चांद नजर आ जाता है तो रमजान 29 दिनों का होगा और अगले दिन Eid al-Fitr मनाई जाएगी.लेकिन यदि उस दिन चांद दिखाई नहीं देता है तो रमजान 30 दिनों का होगा और ईद एक दिन बाद मनाई जाएगी.
अलविदा जुमा का महत्व
रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा जुमा कहा जाता है. यह दिन रमजान की विदाई का प्रतीक माना जाता है और इस दिन मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है.
रमजान में रोजा रखने से इंसान को आत्मिक शक्ति और धैर्य मिलता है. रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि यह आत्मसंयम, धैर्य और दूसरों के प्रति सहानुभूति का अभ्यास भी है. रमजान के महीने में दान और जरूरतमंदों की मदद करना भी बहुत पुण्य का काम माना जाता है. लोग इस दौरान जकात और सदका देकर गरीबों की सहायता करते हैं.
बच्चों और युवाओं में भी उत्साह
रमजान के महीने में बच्चों और युवाओं में भी खास उत्साह देखने को मिलता है. कई बच्चे पहली बार रोजा रखने की कोशिश करते हैं और परिवार के साथ इफ्तार में शामिल होते हैं. घरों में इफ्तार के समय खास पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें खजूर, फल, पकौड़े, शरबत और कई पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं.
ईद की तैयारियां शुरू
रमजान के अंतिम दिनों के साथ ही लोग ईद की तैयारियां भी शुरू कर देते हैं. बाजारों में कपड़ों, मिठाइयों और खाने-पीने की चीजों की खरीदारी बढ़ जाती है.
हालाँकि, रमजान के दौरान मस्जिदों में नमाज और कुरान की तिलावत का खास माहौल देखने को मिलता है. रोजेदार सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं और रात में तरावीह की नमाज अदा करते हैं.
इस तरह रमजान का 26वां रोजा मुसलमानों के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि इसके बाद आने वाली रात शब-ए-कद्र की रात हो सकती है. इस पवित्र समय में लोग अल्लाह की इबादत कर दुआ मांगते हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने की कोशिश करते हैं.
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