Ritu Jaiswal BJP Join: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दरअसल, आज 26 मई 2026 को मंगलवार के दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की चर्चित नेता और ‘मुखिया दीदी’ (Mukhiya Didi) के नाम से मशहूर रितु जायसवाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गईं। बताया जा रहा है कि यह लंबे समय तक तेजस्वी यादव की करीबी रही है और अब रितु के भाजपा में जाने से बिहार की राजनीति ने एक नया मोड़ ले लिया है। खासतौर पर मिथिलांचल और महिला वोट बैंक (Women Vote Bank) को लेकर इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा में शामिल होने के बाद रितु जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर तारीफ की और कहा कि भाजपा ‘नेशन फर्स्ट’ (BJP Nation First) की सोच के साथ काम करती है।
भाजपा में शामिल होते ही दिया बड़ा बयान
रितु जायसवाल ने भाजपा जॉइन करने के बाद एक बड़ा बयान भी दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अब पूरी मजबूती के साथ भाजपा की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम करेंगी। उन्हें भाजपा की कार्यशैली और राष्ट्रहित की राजनीति ने प्रभावित किया है। इसके अलावा, रितु ने यह भी कहा कि राजनीति केवल सत्ता के लिए नहीं बल्कि समाज सेवा के लिए होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ही ऐसी पार्टी है जो विकास और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देती है।
टिकट नहीं मिलने से बढ़ी थी नाराजगी
बता दें कि रितु जायसवाल लंबे समय तक RJD का बड़ा चेहरा रही हैं। साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से टिकट नहीं दिया गया था। टिकट कटने के बाद उन्होंने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन बाद में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने करीब 64 से 65 हजार वोट हासिल कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का एहसास कराया। चुनाव के बाद RJD ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था। तभी से उनके भाजपा में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं।

मुझे बागी कहा गया: रितु जायसवाल
मीडिया से बातचीत के दौरान रितु जायसवाल ने कहा कि जब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया, तब उन्हें ‘बागी’ कहा गया था। लेकिन असल में जनता व्यवस्था से नाराज थी और लोग उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाना चाहते थे। सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयान और वीडियो वायरल कर उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की जाएगी, लेकिन वह इससे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि वह निडर होकर जनता की आवाज उठाती रहेंगी।
पंचायत राजनीति से बनीं ‘मुखिया दीदी’
रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर गांव की पंचायत राजनीति (Panchayat Politics) से शुरू हुआ था। सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी पंचायत से उन्होंने अपनी पहचान बनाई। साल 2016 में वह पंचायत की मुखिया चुनी गईं। गांव में विकास कार्यों, महिलाओं के लिए योजनाओं और साफ-सफाई जैसे मुद्दों पर काम करके उन्होंने अलग पहचान बनाई। धीरे-धीरे लोग उन्हें ‘मुखिया दीदी’ (Mukhiya Didi) के नाम से पहचानने लगे। उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। पंचायत स्तर पर किए गए विकास कार्यों की वजह से उन्हें कई बड़े सम्मान मिले।
रितु जायसवाल को मिले कई राष्ट्रीय सम्मान
रितु जायसवाल को पंचायत और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम करने के लिए कई पुरस्कार मिले हैं।
- 2017 में उन्हें ‘आदर्श युवा सरपंच सम्मान’ दिया गया।
- 2018 में उन्हें उपराष्ट्रपति के हाथों ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ पुरस्कार मिला।
- 2019 में उनकी पंचायत को ‘दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
इन उपलब्धियों के कारण उनकी पहचान केवल बिहार तक सीमित नहीं रही बल्कि राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची।
RJD में तेजी से बढ़ा राजनीतिक कद
राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव भले ही वह नहीं जीत सकीं, लेकिन उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां दीं। RJD में उनका कद तेजी से बढ़ रहा था और उन्हें तेजस्वी यादव की करीबी नेताओं में गिना जाने लगा। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में RJD ने उन्हें शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने करीब 4.74 लाख वोट हासिल किए, लेकिन करीब 29 हजार वोटों से हार गईं।
भाजपा को कैसे मिलेगा फायदा?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रितु जायसवाल का भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है। मिथिलांचल क्षेत्र (Mithilanchal Region) में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ग्रामीण इलाकों में उनकी अलग पहचान है और महिला नेताओं में भी उनकी अच्छी लोकप्रियता है। पंचायत स्तर पर उनका मजबूत नेटवर्क भाजपा को आगामी चुनावों में फायदा पहुंचा सकता है।
बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल
रितु जायसवाल के भाजपा में शामिल होने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे भाजपा की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि पंचायत स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाली महिला नेता का भाजपा में जाना RJD के लिए झटका साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में इसका असर बिहार की राजनीति (Bihar Politics) और चुनावी समीकरणों पर साफ दिखाई दे सकता है।
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