राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम तीन बच्चे के जन्म पर अपने विचार व्यक्त किए थे। इनके इस बयान को लेकर AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मोहन भागवत को तीखा जवाब दिया है।
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बता दें कि भागवत ने भारतीय नागरिकों को तीन बच्चे होने चाहिए। अपने इस बयान को शास्त्रों से भी जोड़ते हुए कहा कि “हम दो और हमारे तीन” की नीति होनी चाहिए।
निजी जिंदगी में दखल देने का कोई अधिकार नहीं
भागवत के इस बयान पर ओवैसी का कहना है कि आरएसएस प्रमुख को लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि आखिर कोई संगठन यह क्यों तय करेगा कि किसी परिवार में कितने बच्चे होने चाहिए। ओवैसी ने कहा कि यह फैसला पति-पत्नी और परिवार का होता है न कि किसी संगठन या नेता इसपर अपनी राय दे।
ओवैसी ने आगे कहा कि आरएसएस के लोग खुद तो शादी नहीं करते है और अधिकतर यह ब्रह्मचर्य का जीवन जीते हैं। “जब आप खुद विवाह नहीं करते हैं, परिवार नहीं बसाते तो फिर दूसरों की जिंदगी में दखल देने का इन्हें क्या अधिकार है?”
ओवैसी ने यह भी कहा कि इस तरह के बयान महिलाओं के लिए सही नहीं है। यह एक तरह का उनके ऊपर बोझ डालने का काम करते हैं। बच्चे पैदा करने का फैसला महिला और उसके परिवार का निजी विषय है, इसमें कोई भी बाहर का व्यक्ति राय थोप नहीं सकता।

मोदी सरकार देश में शिक्षा, रोजगार देने में नाकाम
- ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा हुए कहा कि भारत में करीब 65 प्रतिशत युवा आबादी को शिक्षा, रोजगार नहीं मिल रहा है।
- मोदी सरकार युवाओं के भविष्या को उज्जवल बनाने में नाकाम रही है। “आज भारत के पास बड़ी संख्या में युवा हैं, लेकिन सरकार उनकी क्षमताओं का सही उपयोग नहीं कर पा रही है।
- ओवैसी ने यह भी आरोप लगया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2019 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण के दौरान जनसंख्या नियंत्रण की बात कही थी और 2024 के चुनावों में भी राजस्थान की एक रैली में मुसलमानों पर ज्यादा बच्चे पैदा करने का आरोप लगाया था।
- “पहले पीएम मोदी जनसंख्या नियंत्रण की बात कर रहे थे और अब भागवत तीन बच्चे पैदा करो पर लोगों को सलाह दे रहे हैं। आखिर असली नीति क्या है?
- इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के बयान समाज में भ्रम पैदा करने का काम करते हैं और असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम करते हैं।
- ओवैसी ने कहा कि देश को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है न कि लोगों की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप की।
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