SBI Share Price: भारतीय शेयर बाजार में 9 फरवरी को SBI (भारतीय स्टेट बैंक) के शेयर ने निवेशकों को बड़ी खुशखबरी दी. दिसंबर 2025 तिमाही के शानदार नतीजों के बाद SBI के शेयर में 6.6% तक की तेज उछाल देखने को मिली और यह निफ्टी का टॉप गेनर बन गया. BSE पर शुरुआती कारोबार में शेयर पिछले बंद भाव से उछलकर 1136.85 रुपये के स्तर तक पहुंच गया. यह तेजी जून 2024 के बाद किसी एक दिन में आई सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है.
नतीजों के बाद देश-विदेश के कई बड़े ब्रोकरेज हाउस ने SBI पर भरोसा जताया है. CLSA और नुवामा जैसी फर्मों ने बैंक की ग्रोथ और कमाई को मजबूत बताया है. वहीं ब्लूमबर्ग के ताजा डेटा के मुताबिक, SBI को कवर करने वाले 49 एनालिस्ट्स में से 42 ने ‘Buy’ रेटिंग दी है और इनमें से कम से कम 5 एनालिस्ट्स ने टारगेट प्राइस बढ़ाया है. इन सभी पॉजिटिव संकेतों ने मिलकर SBI के शेयर को बाजार का स्टार बना दिया.
नतीजों ने बदला माहौल, निवेशकों में लौटा भरोसा
SBI के अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहे. बैंक का शुद्ध स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 24.48% बढ़कर 21,028.15 करोड़ रुपये पहुंच गया. एक साल पहले इसी तिमाही में मुनाफा 16,891.44 करोड़ रुपये था.
इतना ही नहीं, बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) भी 9% बढ़कर 45,190 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल इसी अवधि में 41,445 करोड़ रुपये थी. कुल आय में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली और यह 9.6% बढ़कर 1,40,914.65 करोड़ रुपये हो गई.
इन मजबूत आंकड़ों ने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया कि SBI की कमाई और बिजनेस ग्रोथ दोनों सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि नतीजों के बाद शेयर में जोरदार खरीदारी देखने को मिली.
CLSA और नुवामा ने क्यों जताया भरोसा?
ब्रोकरेज हाउस CLSA के मुताबिक, SBI की सीक्वेंशियल लोन ग्रोथ अपने कॉम्पिटीटर PSU बैंकों के साथ-साथ बड़े प्राइवेट बैंकों से भी बेहतर रही है. इसका मतलब यह हुआ कि बैंक ने कर्ज देने के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर प्रदर्शन किया है.
वहीं नुवामा (Nuvama) का कहना है कि SBI की कोर कमाई लगातार तीसरी तिमाही में प्राइवेट बैंकों से मजबूत रही है. यानी बैंक की असली कमाई की क्षमता मजबूत बनी हुई है, जो लंबे समय में शेयर के लिए पॉजिटिव संकेत मानी जाती है.
इन रिपोर्ट्स के आने के बाद बाजार में यह संदेश गया कि SBI सिर्फ सरकारी बैंक नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में कई प्राइवेट बैंकों को टक्कर दे रहा है. इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ.
निफ्टी का टॉप गेनर क्यों बना SBI?
9 फरवरी को बाजार की चाल भले ही मिली-जुली रही हो, लेकिन SBI का शेयर निफ्टी के टॉप गेनर्स में शामिल रहा. इसकी वजहें साफ हैं:
- तिमाही नतीजों में मजबूत मुनाफा और इनकम ग्रोथ
- ब्रोकरेज हाउस की पॉजिटिव रेटिंग और बढ़ा हुआ टारगेट प्राइस
- बैंक की लोन ग्रोथ और कोर कमाई में मजबूती
- आने वाले समय के लिए बेहतर गाइडेंस
- इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर SBI को बाजार में एक मजबूत स्टोरी बना दिया
NIM में हल्की गिरावट, फिर भी तस्वीर पॉजिटिव
SBI का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) दिसंबर 2025 तिमाही में 3.12% रहा, जो एक साल पहले 3.15% था. यानी NIM में हल्की सी गिरावट देखने को मिली. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इतनी छोटी गिरावट बैंक की कुल परफॉर्मेंस को कमजोर नहीं बनाती.
बैंक की लोन ग्रोथ, इनकम और मुनाफे में जो मजबूती दिखी है, वह NIM में मामूली गिरावट की भरपाई कर देती है. इसके अलावा, SBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी गाइडेंस भी बढ़ा दी है, जो भविष्य को लेकर पॉजिटिव संकेत है.
ब्रोकरेज की राय: आगे भी दिख सकती है तेजी?
ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, SBI को ट्रैक करने वाले 49 में से 42 एनालिस्ट्स ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग दी है. यह बताता है कि बाजार के ज्यादातर एक्सपर्ट्स SBI के फ्यूचर को लेकर आशावादी हैं.
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर बैंक की ग्रोथ इसी तरह बनी रही और एनपीए (NPA) पर कंट्रोल रहा, तो आने वाले महीनों में शेयर में और तेजी देखने को मिल सकती है. हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहता है, इसलिए निवेशकों को सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए.
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
SBI की यह रैली यह दिखाती है कि अच्छे नतीजे और पॉजिटिव एनालिस्ट रिपोर्ट शेयर की कीमत को तेजी से ऊपर ले जा सकते हैं. लेकिन निवेश करते समय सिर्फ एक दिन की तेजी देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए.
लंबे समय के निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी है कि बैंक की कमाई, ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और मैनेजमेंट की रणनीति कैसी है. फिलहाल SBI इन सभी मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन करता दिख रहा है, जो निवेशकों के लिए एक पॉजिटिव संकेत है.
आगे का आउटलुक: गाइडेंस बढ़ाकर दिया भरोसा
SBI मैनेजमेंट ने आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना गाइडेंस बढ़ा दिया है. यह इस बात का संकेत है कि बैंक को अपने बिजनेस ग्रोथ और कमाई पर भरोसा है. जब कोई बड़ी कंपनी या बैंक अपना गाइडेंस बढ़ाता है, तो इसका मतलब होता है कि उसे आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होता है और शेयर में पॉजिटिव मूवमेंट देखने को मिल सकता है.



