Verdict on Sheikha Hasina: बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने आज यानी सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां ख़ान कमाल को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी माना है, जिसके चलते उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई है।
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बता दें कि यह दोनों वर्तमान समय में भारत में ही निवास कर रहे हैं। अब बांग्लादेश सरकार ने इन्हें भारत को सौंपने की मांग की है।
बांग्लादेश मंत्रालय का भारत सरकार से अनुरोध
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि अगर कोई भी देश इन भगोड़ों को शरण देता है, तो यह अमित्र व्यवहार माना जाएगा और यह न्याय की अवमानना का गंभीर कृत्य होगा। मंत्रालय ने भारत सरकार से अनुरोध किया कि दोनों दोषियों को तुरंत बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपा जाए, क्योंकि दोनों देशों के बीच एक कानूनी समझौता है।
इस संदर्भ में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी है। भारत, निकट पड़ोसी के रूप में बांग्लादेश के लोगों के हितों, शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के लिए हमेशा साथ है, लेकिन वही, मंत्रालय ने किसी तत्काल प्रत्यर्पण की घोषणा नहीं की।

इन अपराध पर मिली सजा
जानकारी के लिए बता दें कि शेख़ हसीना पर पिछले साल जुलाई और अगस्त महीने में हुए सरकार विरोधी आंदोलन और विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप लगाए गए थे। साथ ही, बांग्लादेश न्यायाधिकरण ने उनके खिलाफ 5 आरोप तय किए, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, साज़िश, उकसावे और सहायता शामिल हैं।
- न्यायाधिकरण ने शेख़ हसीना पर दो मामलों में मौत की सज़ा और एक मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है।
- पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां ख़ान कमाल को भी मौत की सज़ा सुनाई है।
- पूर्व आईजी पुलिस अब्दुल्ला अल मनून को सरकारी गवाह बनने के कारण 5 साल की सज़ा सुनाई।
कोर्ट के बाहर हुई नारेबाजी
फैसले के समय ढाका में कोर्ट के अंदर और बाहर भारी संख्या में लोग मौजूद थे। खबरों के अनुसार, जैसे ही मौत की सज़ा सुनाई गई, लोग छोटे समूहों में फांसी देने के नारे-बाजी करने लगें। कोर्ट ने लोगों से शिष्टाचार बनाए रखने का भी अनुरोध किया।
हजारों लोगों की मौत और कई घायल
मिली जानकारी के अनसुरा, अभियोजन पक्ष ने आरोपों के समर्थन में करीब 747 पेजों की एक दस्तावेज़ कॉपी और मृतकों की सूची न्यायाधिकरण में जमा कराई। वही, आरोपों के अनुसार आंदोलन के दौरान लगभग 1,400 लोगों की हत्या और करीब 25,000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा, शेख़ हसीना ने छात्रों को उकसावे वाली भी टिप्पणियाँ दी थीं, जिससे हिंसा से भयानक रूप लिया था।
भारत में है शेख हसीना
इस आंदोलन में हिंसा बढ़ने के बाद शेख़ हसीना को अगस्त 2024 में अपनी सत्ता छोड़नी पड़ी और तब से लेकर आज तक वह भारत में ही रह रही हैं। अब बांग्लादेश सरकार का कहना है कि न्याय की रक्षा और दोषियों को दंडित करना उनकी प्राथमिकता है। इसलिए भारत उन्हें तुंरत बांग्लादेश के हवाले करें।
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