Silver Price Today: बजट से पहले ही चांदी के बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली है। दरअसल, आज शुक्रवार, 30 जनवरी को चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जिसमें घरेलू वायदा बाजार MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी करीब 5 फीसदी तक टूट गई है। इस अचानक आई गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों का ध्यान खींचा है। बाजार जानकारों का मानना है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी और डॉलर का मजबूत होना मुख्य कारण है। वहीं, सुबह करीब 9:21 बजे MCX पर चांदी का भाव 3,91,331 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता देखा गया। यह अपने पिछले बंद भाव से करीब 4.72 फीसदी कम था। खास बात यह है कि इससे एक दिन पहले ही चांदी ने 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया था। यानी बहुत कम समय में चांदी ने तेज उछाल भी देखा और फिर उतनी ही तेजी से गिरावट भी आ गई।
क्यों आई चांदी में गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि,चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी माना जा रहा है। जब वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की मांग घटती है या निवेशक मुनाफावसूली शुरू करते हैं, तो उसका असर सीधे भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।
वहीं, इसके अलावा अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना भी एक बड़ी वजह है। आम तौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना-चांदी जैसी धातुओं पर दबाव बनता है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इनकी कीमत डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने से ये धातुएं महंगी पड़ती हैं, जिससे मांग घट सकती है और कीमतों में गिरावट आती है।
कॉमेक्स बाजार का हाल
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो कॉमेक्स (COMEX) पर भी चांदी में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में यहां चांदी में करीब 9 फीसदी तक की गिरावट आई। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी भी देखने को मिली। इसके बाद चांदी लगभग 110.08 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड करती नजर आई। फिर भी यह अपने पिछले स्तर से करीब 3.8 फीसदी नीचे रही। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भी चांदी दबाव में है और निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

बजट का भी असर
बाजार के जानकार मानते हैं कि बजट से पहले अक्सर कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है। निवेशक नई नीतियों, टैक्स ढांचे और आर्थिक घोषणाओं को लेकर इंतजार की स्थिति में रहते हैं। ऐसे समय में कई निवेशक मुनाफावसूली कर लेते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आ सकती है।
साथ ही, इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। हाल ही में चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं, ऐसे में कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा बुक करना बेहतर समझा। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
अलग-अलग शहरों में क्या रहे भाव
देश के अलग-अलग शहरों में चांदी की कीमतों में ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिला। आमतौर पर चांदी के रेट पूरे देश में लगभग समान रहते हैं। हालांकि स्थानीय टैक्स, ज्वैलर्स का मार्जिन और लॉजिस्टिक खर्च की वजह से थोड़ा बहुत फर्क जरूर आ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर इस गिरावट का असर पूरे देश में देखने को मिला और ज्यादातर शहरों में चांदी सस्ती हुई।
आगे क्या कहते हैं संकेत
ऑगमोंट बुलियन की 29 जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार चांदी का 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर जाना कोई मामूली बात नहीं थी। यह सिर्फ छोटे निवेश या सट्टेबाजी का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम भी थे। जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर कीमती धातुओं की तरफ रुख करते हैं। बताया जा रहा है कि, अगर चांदी 118 डॉलर प्रति औंस यानी करीब 4.05 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर मजबूती से टिकती है, तो इसमें आगे और तेजी आ सकती है। ऐसी स्थिति में कीमतें 125 से 130 डॉलर तक भी जा सकती हैं।
वहीं अगर चांदी 110 डॉलर के नीचे फिसलती है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। ऐसे में इसके 103 से 98 डॉलर तक आने की संभावना जताई गई है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा है, इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। जो लोग लंबी अवधि के निवेशक हैं, वे हर गिरावट को अवसर के तौर पर देख सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए।छोटे निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की दिशा साफ होने तक इंतजार करें। बजट और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बाद ही चांदी की कीमतों में स्थिर रुख देखने को मिल सकता है।
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