सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट और दिव्यांगों से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले एडल्ट कंटेंट के लिए किसी न किसी को जिम्मेदार बनाना जरूरी है।
केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में सख्त रेगुलेशन बनाने और कानून को SC/ST एक्ट की तरह कड़ा करने का निर्देश दिया गया।
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अश्लील कंटेंट मामला

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के स्टैंड अप कॉमेडियन समय रैना के शो में बोल्ड कॉमेडी दिखाई जाती है। फरवरी में रिलीज हुए दो एपिसोड पर विवाद हुआ, जिसमें पेरेंट्स और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें थीं।
समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया के खिलाफ महाराष्ट्र, असम समेत कई राज्यों में FIR दर्ज हुई। रणवीर ने FIR रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई।
कोर्ट का रुख
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CJI सूर्यकांत: अगर कोई अपना चैनल बनाता है और कुछ भी अपलोड करता है, तो किसी को तो जवाबदेही लेनी होगी।
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जस्टिस बागची: गंदा मटीरियल अपलोड होने के बाद लाखों लोग देख लेते हैं। इसे कैसे नियंत्रित करेंगे?
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SG तुषार मेहता: बोलने की आजादी कीमती है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंटेंट पर स्पष्ट चेतावनी होनी चाहिए। यह चेतावनी सिर्फ 18+ के लिए नहीं, बल्कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए हो। वीडियो शुरू होने से पहले 2 सेकंड की वॉर्निंग और जरूरत पड़ने पर उम्र की वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी हो।
दिव्यांगों से जुड़ा मामला

फरवरी में समय रैना ने शो में दिव्यांगों का मजाक उड़ाया। इसके खिलाफ SMA फाउंडेशन ने याचिका दायर की। कोर्ट ने आदेश दिया कि समय रैना और टीम शो में दिव्यांग लोगों की सफलता की कहानियां दिखाएं, ताकि उनकी मदद के लिए फंड जुटाया जा सके।
10 में से 6 कॉमेडियन ने कहा कि वे महीने में ऐसे दो शो करेंगे। CJI ने चेताया कि भविष्य में बहुत सावधान रहना होगा।
निष्कर्ष
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सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया अश्लील कंटेंट के लिए जिम्मेदारी तय करने का आदेश दिया।
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केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में नियम बनाने का अल्टीमेटम।
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दिव्यांगों के लिए फंड जुटाने और सही कंटेंट दिखाने के निर्देश।
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कोर्ट ने चेताया कि भविष्य में ऐसे मामलों में सतर्क रहना आवश्यक है।
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