ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.उनके खिलाफ झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद अब मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है.स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की है.वहीं, पुलिस इस हाई प्रोफाइल मामले में बेहद सतर्कता से जांच कर रही है और हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है. 21 फरवरी 2026 को प्रयागराज की एडीजे रेप और पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने पुलिस को यौन शोषण के आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करने का आदेश दिया था.इसके बाद झूंसी थाने में केस दर्ज हुआ और अब पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
क्या है पूरा मामला?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मामला नाबालिग से जुड़ा होने के चलते पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया मामले में जांच जरूरी है और पुलिस को कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए. एफआईआर दर्ज होते ही यह मामला हाई प्रोफाइल बन गया, क्योंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद देश के प्रमुख धार्मिक नेताओं में गिने जाते हैं और उनका प्रभाव धार्मिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में माना जाता है.
जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे शंकराचार्य
एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है. उनके वकीलों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक साजिश का हिस्सा है और उन्हें बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं. हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से केस डायरी और जांच की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट यह देखना चाहती है कि अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है और आरोपी पक्ष का क्या रुख है.
पुलिस की जांच और अब तक की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच टीम बनाई गई है. शुरुआती चरण में पुलिस ने शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया.मेडिकल और डिजिटल सबूत जुटाने की प्रक्रिया शुरू की,कथित घटनाओं से जुड़े स्थानों का निरीक्षण किया और सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स खंगालने की प्रक्रिया शुरू की. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि “मामला संवेदनशील है.जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी.कोई भी कानून से ऊपर नहीं है.”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार,बताया आरोप को साजिस
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या पर उन्हें स्नान से रोका गया और तभी से उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई. उन्होंने एक तस्वीर दिखाकर दावा किया कि प्रयागराज का एक पुलिस अधिकारी आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ केक काटते हुए दिख रहा है, जिससे उन्होंने यह संकेत दिया कि किसी विशेष व्यक्ति को बचाने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की. अदालत के आदेश के बाद ही मजबूरी में मामला दर्ज किया गया. हालाँकि,प्रशासन और पुलिस 18 जनवरी से उनके खिलाफ सक्रिय हो गए थे. वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) उन पर गौ रक्षा अभियान से पीछे हटने का दबाव बना रहा था.
पुलिस और प्रशासन पर उठाए सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश तथ्यों से ज्यादा कानूनी प्रक्रियाओं पर आधारित था. उनका दावा है कि कुछ लोग पर्दे के पीछे से इस पूरे मामले को संचालित कर रहे हैं.हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है और किसी भी तरह का दबाव या पक्षपात नहीं है.
धार्मिक संगठनों और समर्थकों की प्रतिक्रिया
इस मामले के सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और शंकराचार्य के समर्थकों में भी बेचैनी देखने को मिल रही है.कुछ समर्थक इसे संत समाज की छवि धूमिल करने की साजिश बता रहे हैं, वहीं कई संत-महंतों ने कहा है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून को अपना काम करना चाहिए.
एक संत ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,“धर्मगुरु होने का मतलब यह नहीं कि कानून से ऊपर हो जाएं। सच्चाई सामने आनी चाहिए.”
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की मांग
वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.उनका कहना है कि मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है, इसलिए इसे बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए. कुछ संगठनों ने मांग की है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, पीड़ित को पूरी सुरक्षा और कानूनी सहायता मिले और धार्मिक प्रभाव के चलते मामले को दबाया न जाए.
आगे क्या हो सकता है?
कानूनी जानकारों के मुताबिक अब इस मामले में तीन अहम मोड़ आ सकते हैं:
- हाईकोर्ट से जमानत पर फैसला
- पुलिस की जांच में नए सबूत सामने आना
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल शुरू होना
अगर हाईकोर्ट से जमानत मिलती है तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से राहत मिल सकती है, लेकिन जांच जारी रहेगी.वहीं जमानत खारिज होने पर पुलिस गिरफ्तारी की कार्रवाई कर सकती है.
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