ठाकरे बंधु एक मंच पर, लेकिन सियासी मिजाज अलग
महाराष्ट्र की राजनीति में 20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे एक साथ आए।
वर्ली डोम में हुई रैली में दोनों ने एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखा। हालांकि, उनके भाषणों का अंदाज अलग-अलग रहा।
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राज ने बीजेपी पर नरमी बरती, उद्धव ने सीधा हमला

जहां उद्धव ठाकरे बीजेपी और मोदी सरकार पर जमकर बरसे, वहीं राज ठाकरे ने चुप्पी साध ली।
उन्होंने हिंदी थोपने के मुद्दे पर मराठी की बात की, लेकिन गठबंधन या बीएमसी चुनाव का जिक्र नहीं किया।
गठबंधन दबाव में, चुनाव तक साथ… फिर क्या?

मनसे और शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं के दबाव में दोनों भाई साथ आए।
हालांकि, सवाल ये है कि बीएमसी चुनाव के बाद भी ये रिश्ता बच पाएगा या नहीं।
पीएम मोदी का नाम तक नहीं लिया राज ठाकरे ने

राज ठाकरे ने अपने पूरे भाषण में न पीएम मोदी का नाम लिया, न बीजेपी को घेरा।
उन्होंने सिर्फ अमित शाह और फडणवीस पर तंज कसा।
उद्धव ने सेट किया अपना पॉलिटिकल एजेंडा

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में साफ किया कि उनकी लड़ाई सिर्फ बीएमसी चुनाव तक सीमित नहीं है।
उनका मकसद पूरे महाराष्ट्र की सत्ता है।
बीजेपी और शिंदे गुट ने की राज ठाकरे की तारीफ

रैली के बाद बीजेपी और एकनाथ शिंदे ने राज ठाकरे के लिए सॉफ्ट कॉर्नर दिखाया।
जबकि उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला किया।
हिंदी विरोध पर भी दोनों भाइयों का तरीका अलग

राज ठाकरे की पार्टी सड़क पर हिंसा करती है, वहीं उद्धव सेना ऐसा करने से बचती है।
मराठी और हिंदी वोटर्स का गणित दोनों के लिए अहम है।
स्टालिन के बयान पर शिवसेना ने दी सफाई
तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने उद्धव को हिंदी विरोध पर बधाई दी।
जवाब में शिवसेना ने कहा- हम हिंदी विरोध नहीं, हिंदी थोपने का विरोध कर रहे हैं।
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