US Iran Deal Pakistan Mediation: ईरान और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है की पाकिस्तान इस समझौते में खुद को अहम मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था, लेकिन आखिरी समय में हालात ऐसे बदले कि इस्लामाबाद को बड़ा झटका लगा है। ऐसे में वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की, जिससे भारत की विदेश नीति एक बार फिर चर्चा में आ गई।
पाकिस्तान को उम्मीद थी, लेकिन मंच कहीं और सज गया
जानकारी के लिए बता दें की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर को उम्मीद थी कि ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले समझौते में उनकी भूमिका को दुनिया के सामने पेश किया जाएगा। खबरें थीं कि इस समझौते पर स्विटजरलैंड में हस्ताक्षर होने वाले हैं और पाकिस्तान भी इस प्रक्रिया का हिस्सा रहेगा। लेकिन आखिरी समय में तस्वीर बदल गई। समझौते पर जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान पेरिस में हस्ताक्षर हुए और पाकिस्तान को कोई अहम भूमिका नहीं मिली। इससे इस्लामाबाद की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
संसद में शहबाज शरीफ ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
दरअसल इस घटनाक्रम के बाद भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संसद में अपने संबोधन के दौरान दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच संवाद स्थापित कराने में पाकिस्तान की भूमिका को दुनिया ने सराहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह सम्मान मिल रहा है, जिसकी कई बड़े देश वर्षों से कोशिश करते रहे हैं। अपने भाषण में उन्होंने जापान, सऊदी अरब, मलेशिया और भारत का नाम लेते हुए कहा कि आज दुनिया पाकिस्तान का सम्मान कर रही है। हालांकि विपक्ष और कई राजनीतिक विश्लेषक शहबाज शरीफ के इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं।
भारत की विदेश नीति पर उठे सवाल अब शांत
बता दें कुछ समय पहले जब पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा था, तब भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए गए थे। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा था और कहा था कि भारत क्षेत्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका खो रहा है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रंप द्वारा पीएम मोदी की सार्वजनिक तारीफ और भारत के साथ मजबूत संबंधों का संकेत देने के बाद यह बहस फिर भारत के पक्ष में जाती दिखाई दे रही है।
ट्रंप ने मोदी की तारीफ कर दिया बड़ा संदेश
जी7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी एक शांत, संयमित और मजबूत नेता हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के संबंध पहले से अधिक मजबूत हो रहे हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत चाहे तो मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उनके इस बयान को भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है।

पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान ने इस समझौते को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। यहां तक कि इस्लामाबाद में बड़े स्तर पर राजनीतिक कार्यक्रम की भी तैयारी की जा रही थी। लेकिन समझौते की अंतिम प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका लगभग गायब रही। इससे सरकार की रणनीति और विदेश नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर निराशा जताई और कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल उम्मीदों से काम नहीं चलता, बल्कि ठोस रणनीति की जरूरत होती है।
कतर ने निभाई अहम भूमिका
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में कतर ने पर्दे के पीछे रहकर ज्यादा प्रभावी भूमिका निभाई। यही वजह रही कि अंतिम समझौते में कतर की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण मानी गई, जबकि पाकिस्तान अपेक्षाकृत पीछे रह गया।
भारत-अमेरिका संबंधों को मिल सकती है नई मजबूती
ईरान के परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और व्यापार जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका के बीच कई मामलों में समान सोच दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है।
ऐसे में एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत ने बदलती वैश्विक राजनीति के बीच अपने हितों को साधने की रणनीति अपनाई है। वहीं पाकिस्तान अभी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
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