भागवत के मुताबिक, धर्म हमारे आचरण, अनुशासन और नियमों के पालन से जुड़ा है।
मोहन भागवत ने कहा कि धर्म का अर्थ धारण करना है। यह लोगों को जोड़ता है और बिखरने से रोकता है।
उन्होंने कहा कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देता है।
भागवत ने युवाओं से बलवान, वैभवशाली, धनवान और बुद्धिमान बनने का आह्वान किया।