RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि धर्म हमारे DNA में है और सभी के लिए कल्याणकारी है।

धर्म हमारे DNA में है

उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुख और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन धर्म नित्य है।

भागवत के मुताबिक, धर्म हमारे आचरण, अनुशासन और नियमों के पालन से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि रिलीजन व्यक्ति को एक अनुशासन में बांधता है, जबकि धर्म व्यक्ति को मुक्त करता है।

मोहन भागवत ने कहा कि धर्म का अर्थ धारण करना है। यह लोगों को जोड़ता है और बिखरने से रोकता है।

उन्होंने कहा कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देता है।

भागवत ने युवाओं से बलवान, वैभवशाली, धनवान और बुद्धिमान बनने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत के युवा पूरी दुनिया में केवल यशस्वी ही नहीं, बल्कि अपने जीवन को सार्थक भी बनाएं।